ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Warns US: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, जहां अमेरिका और इजरायल के ईरान पर संयुक्त हमले के बाद स्थिती दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। इसी बीच ईरान की ओर से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को कड़ी चेतावनी दी गई है। ईरान के एक शीर्ष अधिकारी मोहसेन रजाई ने कहा कि अमेरिका के पास युद्ध से निकलने के लिए अब बस कुछ ही समय बचा है।
मोहसेन रजाई ने एक इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका के पास इस “दलदल” से बाहर निकलने के लिए बहुत कम समय बचा है। उन्होंने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि अगर अमेरिकी सेना ईरान के बुनियादी ढांचे पर हमला करती है, तो जवाब “आंख के बदले आंख” नहीं, बल्कि “आंख के बदले सिर” की तर्ज पर दिया जाएगा। उनका दावा था कि ऐसी स्थिति में ईरान अमेरिका को गंभीर नुकसान पहुंचाकर उसे पूरी तरह अस्थिर कर सकता है।
रजाई का यह बयान उस घोषणा के ठीक बाद आया, जिसमें ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका अगले पांच दिनों तक ईरान के ऊर्जा संयंत्रों और पावर प्लांट्स पर हमले नहीं करेगा। हालांकि ईरान ने इस कदम को शांति की पहल नहीं माना। रजाई ने इसे “मनोवैज्ञानिक युद्ध” बताते हुए कहा कि अमेरिका विरोधाभासी बयान देकर ईरान का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन तेहरान इससे प्रभावित नहीं होगा।
इंटरव्यू के दौरान रजाई ने यह भी कहा कि मौजूदा संघर्ष तब तक जारी रहेगा, जब तक ईरान को हुए नुकसान की भरपाई नहीं की जाती। उन्होंने अमेरिका से मुआवजे की मांग करते हुए तीन स्पष्ट शर्तें रखीं पहली, युद्ध में हुए नुकसान की पूरी भरपाई; दूसरी, ईरान पर लगे सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत हटाया जाए; और तीसरी, भविष्य में ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की गारंटी दी जाए।
इस बीच क्षेत्रीय स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। पाकिस्तान ने मध्यस्थता की पेशकश करते हुए दोनों देशों को वार्ता के लिए आमंत्रित किया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सोशल मीडिया के जरिए ईरान और अमेरिका को इस्लामाबाद में बातचीत के लिए बुलाया।
यह भी पढ़ें- Meta पर फूटा अमेरिकी कोर्ट का गुस्सा, बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ के आरोप में लगा 3100 करोड़ का जुर्माना
हालांकि हालात अभी भी बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। डोनाल्ड ट्रंप ने जहां ईरानी नेतृत्व के साथ “सकारात्मक बातचीत” का दावा किया, वहीं तेहरान ने इसे पूरी तरह खारिज करते हुए “फेक न्यूज” बताया। ईरान का कहना है कि ऐसे बयान सिर्फ वैश्विक बाजार को प्रभावित करने की रणनीति हैं, न कि वास्तविक कूटनीतिक प्रगति।