अमेरिका ने भेजे कमांडो, ईरान बोला- Welcome To Iran, Habibi; यहां आपका मुकाबला असली धुरंधरों से होगा

Iran Warning US Paratroopers: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिकी सैनिकों को कड़ा संदेश देते हुए कहा कि उसके लड़ाके जमीनी युद्ध में माहिर हैं और किसी भी टकराव के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
US Deploys Commandos; Iran Responds: "Welcome to Iran, Habibi—Here, You Will Face the Real Heavyweights."
सांकेतिक तस्वीर
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Iran Military Warning To US Soldiers: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका को एक बार फिर कड़ा और सीधा संदेश दिया है।  ईरान की ओर से जारी सोशल मीडिया पोस्ट में अमेरिकी सैनिकों को चेतावनी दी गई है कि अगर किसी भी तरह का जमीनी युद्ध होता है तो उन्हें बेहद प्रशिक्षित और अनुभवी लड़ाकों का सामना करना पड़ेगा।

इस X पोस्ट में लिखा है कि  Welcome to Iran, Habibi। ईरान केवल एक देश नहीं बल्कि एक ऐसा क्षेत्र है जहां फिलिस्तीनी, लेबनानी, इराकी और यमनी लड़ाकों ने वर्षों के संघर्ष के दौरान जमीनी युद्ध में उच्च स्तर की महारत हासिल की है। इन लड़ाकों का अनुभव उन्हें बेहद खतरनाक बनाता है।

मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे अमेरिका के पैराट्रूपर्स

बता दें कि जहां एक ओर कूटनीतिक स्तर पर शांति की अपील की जा रही है, वहीं दूसरी ओर रणनीतिक मोर्चे पर अमेरिका ने अपनी सबसे घातक और बिजली की रफ्तार से हमला करने वाली सैन्य इकाई को एक्टिव कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन ने अपनी 'इमीडिएट रिस्पॉन्स फोर्स' (IRF) के लगभग 3,000 अतिरिक्त पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी पूरी कर ली है। जिसको लेकर ईरान पूरी तरह से भड़का हुआ है।

क्या है 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की खासियत?

अमेरिकी सेना की 82वीं एयरबोर्न डिवीजन को तेजी से कार्रवाई करने वाली इकाइयों में सबसे आगे माना जाता है। इन सैनिकों की सबसे बड़ी ताकत इनकी गति और लचीलापन है। रक्षा विशेषज्ञों और रिपोर्टों के अनुसार, यह फोर्स महज 18 घंटों के भीतर दुनिया के किसी भी कोने में पहुंचकर सैन्य कार्रवाई शुरू करने में सक्षम है। इन्हें 'पैराट्रूपर्स' कहा जाता है क्योंकि ये जमीन पर सामान्य सैनिकों की तरह मार्च करने के बजाय सीधे आसमान से दुश्मन के इलाके में पैराशूट के जरिए उतरते हैं।

कैसी होती है इनकी ट्रेनिंग?

इन पैराट्रूपर्स का प्रशिक्षण बेहद कठिन होता है। इनका मुख्य ठिकाना फोर्ट ब्रैग है जहां हर महीने लगभग 10,000 ट्रेनिंग जंप आयोजित की जाती हैं ताकि सैनिक हर स्थिति के लिए तैयार रहें। इनकी वर्दी पर लगा 'AA' का पैच इन्हें 'ऑल अमेरिकन' की पहचान देता है जिसका इतिहास प्रथम विश्व युद्ध से जुड़ा है। द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भी इस डिवीजन ने नीदरलैंड को आजाद कराने जैसे साहसी मिशनों में अपनी बहादुरी का लोहा मनवाया था।

किसलिए ये ईरान आ रहे?

मौजूदा संकट में इन पैराट्रूपर्स की तैनाती का मुख्य उद्देश्य ईरान की मारक दूरी के भीतर स्थित महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को सुरक्षित रखना हो सकता है। चूंकि ये सैनिक सीधे दुश्मन के पीछे हमला करने में माहिर हैं इसलिए इनकी मौजूदगी ईरान के लिए एक बड़ी चुनौती मानी जा रही है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी चेतावनी दी है कि उसके पास जमीनी युद्ध में माहिर लड़ाकों की फौज है जो अमेरिकी सेना का सामना करने के लिए तैयार है।

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