Iran War का दुनिया पर भारी असर: 50 दिन में 50 अरब डॉलर का Crude Oil हुआ स्वाहा, महंगाई का बड़ा खतरा
Iran War Impact: ईरान पर अमेरिका और इजरायल के युद्ध के कारण दुनिया भर में Crude Oil की भारी कमी हो गई है। लगभग 50 दिनों के भीतर ही 50 अरब डॉलर का 50 करोड़ बैरल तेल बाजार से पूरी तरह गायब हो गया है।
- Written By: प्रिया सिंह
वैश्विक तेल संकट (सोर्स-सोशल मीडिया)
Global Oil Supply Crisis: ईरान पर अमेरिका और इजरायल की जंग का सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। इस बड़े वैश्विक तेल आपूर्ति संकट के कारण वैश्विक सप्लाई और कीमतों पर गहरा प्रभाव पड़ा है। संघर्ष शुरू होने के बाद से अब तक करीब 50 दिनों में बहुत बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। रिपोर्ट्स के अनुसार इसका बुरा असर आने वाले कई महीनों और सालों तक स्पष्ट रूप से महसूस किया जाएगा।
तेल की भारी कमी
बीते 50 दिनों में बाजार से 50 अरब डॉलर का Crude Oil पूरी तरह स्वाहा हो चुका है। करीब 50 करोड़ बैरल Crude Oil और कंडेनसेट बाजार तक नहीं पहुंच पाने से दुनिया में हाहाकार मचा है। यह आधुनिक समय में एनर्जी सप्लाई की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
सप्लाई का बड़ा गणित
गायब हुआ यह 50 करोड़ बैरल तेल इतना है कि दुनिया में हवाई यात्रा 10 हफ्ते चल सकती थी। इससे दुनिया की सभी गाड़ियों को 11 दिन या पूरी दुनिया को 5 दिन तक तेल मिल सकता था। यह अमेरिका की लगभग एक महीने और यूरोप की एक महीने से अधिक की तेल जरूरत के बराबर है।
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खाड़ी देशों पर प्रभाव
मार्च महीने में खाड़ी देशों का तेल उत्पादन गिरकर 80 लाख बैरल प्रति दिन तक पहुंच गया। यह भारी कमी दुनिया की दो बड़ी तेल कंपनियों के कुल उत्पादन के बराबर मानी जा रही है। इस दौरान खाड़ी देशों से जेट फ्यूल का निर्यात 19.6 मिलियन बैरल से घटकर मात्र 4.1 मिलियन बैरल रह गया।
कीमतों में भारी उछाल
Crude Oil की भारी कमी के कारण इसकी कीमतें उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। सप्लाई रुकने से हुआ 50 अरब डॉलर का नुकसान जर्मनी की सालाना जीडीपी के 1% के बराबर है। अप्रैल के महीने में ही ग्लोबल स्टोरेज में करीब 4.5 करोड़ बैरल की भारी कमी आ चुकी है।
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भविष्य का बड़ा खतरा
मार्च के बाद से रोजाना करीब 1.2 करोड़ बैरल तक तेल का उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। कुवैत और इराक के भारी तेल वाले फील्ड्स को सामान्य होने में 4-5 महीने और इंफ्रास्ट्रक्चर को सालों लग सकते हैं। इसके कारण आगे ट्रांसपोर्ट, एविएशन और रोजमर्रा की चीजों में भारी महंगाई देखने को मिल सकती है।
