Iran US War: ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता और ट्रंप की शर्तों को मारी ठोकर, मुनीर-शरीफ की बढ़ी मुश्किलें

Iran US War Pakistan Mediation: ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध विराम कराने की पाकिस्तान की कोशिशें नाकाम रही हैं। तेहरान ने ट्रंप की शर्तों को खारिज करते हुए अमेरिकी विमानों पर हमले तेज कर दिए हैं।
Iran-US War: Iran Rejects Pakistan's Mediation and Trump's Conditions; Difficulties Mount for Munir and Sharif
डोनाल्ड ट्रंप, शहबाज शरीफ और मोजतबा खामेनेई, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Rejects Pakistan Role In Iran US Talks: Middle East में चल रहा तनाव अब एक नए और खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता कर युद्ध विराम कराने की पाकिस्तान की उम्मीदों को तेहरान ने करारा झटका दिया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, ईरान ने न केवल पाकिस्तान की मध्यस्थता को ठुकरा दिया है, बल्कि डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रखी गई सभी शर्तों को भी सिरे से खारिज कर दिया है। इस कूटनीतिक विफलता के बाद ईरान ने क्षेत्र में इजरायल और अमेरिका पर अपने हमले और भी तेज कर दिए हैं।

अमेरिकी वायुसेना को लगा सबसे बड़ा झटका

युद्ध के मैदान से आ रही खबरें अमेरिका के लिए चिंताजनक हैं। पिछले 24 घंटों के भीतर, ईरान ने अमेरिकी सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाने का दावा किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने अमेरिका के अत्याधुनिक F-35 और F-15 समेत दो फाइटर जेट्स को मार गिराया है। इसके अतिरिक्त, एक A-10 एयरक्रॉफ्ट और कई सैन्य हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, यह इस युद्ध में अब तक का सबसे बड़ा अमेरिकी नुकसान है जिसने वाशिंगटन की रणनीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुनीर और शहबाज की कूटनीतिक विफलता

इस पूरे घटनाक्रम ने पाकिस्तान के सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर असहज स्थिति में डाल दिया है। पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल असीम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने डोनाल्ड ट्रंप को यह भरोसा दिलाया था कि वे ईरान को शांति वार्ता के लिए राजी कर लेंगे। हालांकि, ईरान के सख्त रवैये ने पाकिस्तान के इन दावों की हवा निकाल दी है। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान अब खुद को बेबस महसूस कर रहा है और ट्रंप प्रशासन को जवाब देने के लिए कोई ठोस आधार नहीं ढूंढ पा रहा है।

पाकिस्तान की 'लाज' बचाने की कोशिश

Iran द्वारा दुत्कारे जाने की खबरों के बीच, पाकिस्तान का विदेश मंत्रालय अपनी छवि बचाने में जुटा है। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने इन मीडिया रिपोर्टों को 'बेबुनियाद' और 'कल्पना मात्र' करार दिया है।

हालांकि, पाकिस्तान के अपने प्रतिष्ठित समाचार पत्र 'डॉन' ने अज्ञात अधिकारियों के हवाले से पुष्टि की है कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जरूर हुआ लेकिन ईरान की ओर से कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन और पाकिस्तान दोनों की अपीलों के बावजूद ईरान फिलहाल बातचीत के मूड में नहीं है।

थमने का नाम नहीं ले रहा Iran युद्ध

ज्ञात हो कि इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी को हुई थी जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर संयुक्त हमला किया था। उस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडर मारे गए थे। इसी का बदला लेने के लिए ईरान अब आर-पार की जंग लड़ रहा है। मौजूदा स्थिति को देखते हुए ऐसा प्रतीत होता है कि तेहरान फिलहाल किसी भी समझौते या मध्यस्थता के लिए तैयार नहीं है, जिससे आने वाले दिनों में संघर्ष और गहराने की आशंका है।

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