जेडी वेंस, मोहम्मद बाघेर गालिबफ (सोर्स- सोशल मीडिया)
US-Iran Peace Talks in Pakistan: ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच चुका है, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी जल्द ही वहां पहुंचने वाला है। ईरान की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबफ कर रहे हैं। इसी बीच खबर सामने आई है कि इस वार्ता में दोनों पक्ष सीधे आमने-सामने बैठकर बातचीत नहीं करेंगे।
जानकारी के अनुसार, दोनों पक्ष सीधे आमने-सामने बैठकर बातचीत करने के बजाय, दोनों प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग कमरों में रहेंगे और पाकिस्तान के अधिकारी एक मध्यस्थ (मैसेज एक्सचेंजर) की भूमिका निभाते हुए दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान कराएंगे। इस प्रक्रिया में पाकिस्तान मध्यस्थ देश की भूमिका निभा रहा है।
ईरानी टीम में विदेश मंत्री अब्बास अराघची, डिप्टी विदेश मंत्री माजिद तख्त-रावंची और सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहम्मद बाघेर जोलकादर शामिल हैं। वहीं अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जेडी वेंस कर रहे हैं, जिनके साथ स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और सेंटकॉम कमांडर ब्रैड कूपर भी मौजूद रहेंगे।
همراهان من در این پرواز#Minab168 pic.twitter.com/xvXmDlSDiF — محمدباقر قالیباف | MB Ghalibaf (@mb_ghalibaf) April 10, 2026
वहीं, मध्यस्थता की भूमिका में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के नेतृत्व में पाकिस्तान सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के सथ सेना प्रमुख आसिम मुनीर, विदेश मंत्री इशाक डार और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार आसिम मलिक आसिफ मलिक शामिल होंगे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान और अमेरिका की रणनीतियों में भी अंतर है ईरान लंबी बातचीत और समय लेने के पक्ष में है, जबकि अमेरिका जल्दी नतीजे चाहता है। इस बीच, ईरान का यह भी मानना है कि समय को एक रणनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है।
यह वार्ता ऐसे समय पर हो रही है जब दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम की घोषणा पहले ही हो चुकी है। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी बनी हुई है। डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार न हों।
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वार्ता से पहले मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने एक भावुक तस्वीर साझा की, जिसमें उन्होंने हाल के संघर्ष में मारे गए बच्चों को श्रद्धांजलि दी। यह संदेश ईरान के भीतर मौजूद गहरे भावनात्मक और राजनीतिक दबाव को भी दर्शाता है, जो इस वार्ता को और जटिल बनाता है।