ईरान-अमेरिका परमाणु वार्ता: अराघची का बड़ा बयान, युद्ध के खतरे से भी ईरान पीछे नहीं हटेगा
Iran Nuclear Negotiations: ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने कहा है कि यूरेनियम संवर्धन देश की संप्रभुता का मुद्दा है। युद्ध की स्थिति में भी ईरान पीछे नहीं हटेगा और अमेरिका पर उसका भरोसा बेहद कम है।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran-US Conflict Resolution: ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत का नया दौर शुरू हो गया है लेकिन तनाव अब भी बरकरार है। विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी कीमत पर यूरेनियम संवर्धन से पीछे नहीं हटने वाला है। ईरानी पक्ष का कहना है कि वे युद्ध की धमकियों से नहीं डरते और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हालांकि बातचीत शुरू हुई है, लेकिन तेहरान को अमेरिका की मंशा पर संदेह है और विश्वास बहाली में अभी लंबा समय लगेगा।
संप्रभुता और संवर्धन
अराघची ने जोर देकर कहा कि यूरेनियम संवर्धन ईरान की संप्रभुता से जुड़ा एक बेहद महत्वपूर्ण और अटूट हिस्सा है जिसे वे कभी नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी विदेशी शक्ति को यह अधिकार नहीं है कि वह ईरान के व्यवहार को अपनी मर्जी से निर्देशित करे। भले ही उन पर युद्ध थोप दिया जाए या प्रतिबंध लगाए जाएं, ईरान अपने इस परमाणु अधिकार से पीछे हटने के लिए कभी तैयार नहीं होगा।
अमेरिका पर अविश्वास
ईरान के विदेश मंत्री ने वॉशिंगटन की मंशा पर गंभीर सवाल उठाए हैं और कहा कि वर्तमान में अमेरिका पर उनका भरोसा बहुत कम है। उन्हें इस बात पर गहरा संदेह है कि क्या अमेरिका वास्तव में इस नई बातचीत की प्रक्रिया को पूरी गंभीरता और ईमानदारी से ले रहा है। ओमान में हुई शुरुआती बैठक को एक अच्छी शुरुआत माना गया है लेकिन दोनों देशों के बीच पुरानी कड़वाहट खत्म होने में काफी समय लगेगा।
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सैन्य मौजूदगी और धमकी
अरब सागर में अमेरिकी एयरक्राफ्ट करियर USS अब्राहम लिंकन की तैनाती पर ईरान ने अपनी बहुत कड़ी और स्पष्ट प्रतिक्रिया व्यक्त की है। ईरान का कहना है कि क्षेत्र में अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैनाती उसे डराने या उसके संप्रभु फैसले बदलने में पूरी तरह से नाकाम रहेगी। अराघची ने कहा कि उनकी असली ताकत परमाणु बम नहीं, बल्कि दुनिया की बड़ी शक्तियों को ‘ना’ कहने की उनकी इच्छा और क्षमता है।
रणनीतिक साझेदारी
इस पूरे घटनाक्रम और चल रही बातचीत के दौरान ईरान अपने मुख्य रणनीतिक साझेदारों चीन और रूस से लगातार सलाह और मशविरा कर रहा है। ईरान का स्पष्ट मानना है कि वह इस मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला नहीं है और वह बहुपक्षीय समर्थन के साथ आगे बढ़ रहा है। वे चाहते हैं कि अमेरिका द्वारा लगाए गए सभी आर्थिक प्रतिबंधों को तुरंत खत्म किया जाए ताकि देश में विकास का नया रास्ता खुल सके।
इजरायल का विरोध
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू इस सप्ताह वॉशिंगटन में डोनाल्ड ट्रंप से मिलकर ईरान पर और अधिक दबाव बनाने की पुरजोर कोशिश करेंगे। इजरायल यह चाहता है कि बातचीत में परमाणु कार्यक्रम के साथ-साथ ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों और क्षेत्रीय सशस्त्र गुटों का मुद्दा भी शामिल हो। लेकिन ईरान ने पहले ही साफ कर दिया है कि वह इन विषयों को किसी भी भविष्य की परमाणु वार्ता का हिस्सा बनाने के पक्ष में नहीं है।
प्रतिबंध और चुनौतियां
ओमान में बातचीत शुरू होने के तुरंत बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर नए टैरिफ लगाने का आदेश दिया है। इसके अलावा ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह रोकने के लिए कई विदेशी शिपिंग कंपनियों और जहाजों पर नए कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं। अराघची के अनुसार ईरान इन सभी संकेतों का गहराई से आकलन कर रहा है और उसके बाद ही तय करेगा कि बातचीत जारी रखनी है या नहीं।
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शांति की संभावनाएं
ईरानी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वे केवल तभी विश्वास बहाली के कदम उठाएंगे जब अमेरिका अपने वादे निभाने में ईमानदारी दिखाएगा। वर्तमान में चल रही वार्ता पिछले साल जून में हुए संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच पहली सीधी और बड़ी कूटनीतिक पहल है। अगर अमेरिका प्रतिबंधों और सैन्य कार्रवाइयों को जारी रखता है, तो इससे शांति स्थापित करने की पूरी प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
