शांति वार्ता के लिए तैयार हुआ ईरान! US मीडिया का दावा जल्द होगी इस्लामाबाद में मीटिंग, तेहरान ने किया इनकार
US-Iran War: अमेरिकी मीडिया आउटलेट CNN ने दावा किया है कि ईरान इस्लामाबाद में होने वाली दूसरे दौर की शांति वार्ता में शामिल होने के लिए मान गया है। हालांकि ईरानी मीडिया ने इन दावों को खारिज किया है।
- Written By: अक्षय साहू
अमेरिका के साथ बातचीत के लिए तैयार हुआ ईरान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Ready to Talks With US: अमेरिकी मीडिया आउटलेट CNN की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता मंगलवार को हो सकती है। खबरों में दावा किया गया है कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद पहुंच सकता है। इस संभावित वार्ता में ईरान की ओर से मुख्य वार्ताकार के रूप में मोहम्मद बाघेर कालिबाफ का नाम सामने आया है, जबकि अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस नेतृत्व कर सकते हैं।
हालांकि, ईरानी मीडिया ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है और कहा है कि फिलहाल इस तरह की किसी वार्ता के लिए कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि पहले वाली टीम के साथ ही एक बार फिर बातचीत शुरू करने की तैयारी है, लेकिन ईरान ने इस पर कोई स्पष्ट रुख नहीं अपनाया है। इससे यह साफ होता है कि दोनों देशों के बीच संवाद को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है।
होर्मुज को लेकर तनाव चरम पर
इसी बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा लागू की गई नौसैनिक नाकेबंदी और ईरान की सख्त प्रतिक्रिया ने हालात को और जटिल बना दिया है। खासकर तब से स्थिति और बिगड़ी है जब अमेरिकी नौसेना ने एक ईरानी कार्गो जहाज पर गोलीबारी करके अपने कब्जे में ले लिया। इस घटना ने दोनों देशों के बीच टकराव को खुलकर सामने ला दिया है।
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अमेरिकी कार्रवाई के बाद फिर जंग की आहट
जहां एक ओर संघर्ष विराम (सीजफायर) के बुधवार तक जारी रहने की उम्मीद थी, वहीं हालात उससे पहले ही बिगड़ गए। अमेरिका की कार्रवाई के जवाब में ईरान ने ड्रोन तैनात कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां बढ़ गई हैं। यह घटनाक्रम शांति वार्ता की संभावनाओं के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
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एक ओर कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, तो दूसरी ओर जमीन और समुद्र दोनों मोर्चों पर तनाव तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि प्रस्तावित वार्ता वास्तव में हो पाएगी या नहीं, और यदि होगी भी तो क्या वह मौजूदा संकट को कम कर सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद में प्रस्तावित दूसरे दौर की शांति वार्ता युद्ध के भविष्य को तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।
