ईरान की ट्रंप को सीधी धमकी: 'इस बार गोली नहीं चूकेगी', मिडिल ईस्ट में बढ़ा युद्ध का खतरा

Threat to Trump: ईरानी सरकारी टीवी ने डोनाल्ड ट्रंप को "गोली नहीं चूकने" की सीधी धमकी दी है। जवाब में ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों पर हो रही हिंसा और फांसी के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की कड़ी चेतावनी दी है।
"The Bullet Won't Miss": Iran Issues Direct Threat to Trump as US Carrier Moves to Middle East
ईरानी सरकारी टीवी ने डोनाल्ड ट्रंप को दी धमकी (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Iran State TV Assassination Threat Trump: वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बढ़ते तनाव ने अब एक खतरनाक मोड़ ले लिया है, जहां ईरानी सरकारी टेलीविजन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सीधी जान से मारने की धमकी दी है। इस प्रसारण में 2024 के पेंसिल्वेनिया चुनावी रैली हमले की तस्वीरों का उपयोग करते हुए चेतावनी दी गई है कि "इस बार गोली लक्ष्य से नहीं चूकेगी"।

यह धमकी ऐसे समय में आई है जब ट्रंप प्रशासन ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों के दमन पर कड़े प्रतिबंधों पर विचार कर रहा है। दोनों देशों के बीच जुबानी जंग अब एक संभावित युद्ध की आहट में बदलती दिख रही है, जिससे मिडिल ईस्ट में स्थिरता को लेकर वैश्विक चिंताएं बढ़ गई हैं।

सरकारी टीवी की खुली धमकी

ईरानी सरकारी टेलीविजन ने हाल ही में एक सनसनीखेज वीडियो संदेश प्रसारित किया है जिसमें डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ हिंसा को उकसाया गया है। इस वीडियो में 13 जुलाई 2024 को बटलर, पेंसिल्वेनिया में हुए जानलेवा हमले की फुटेज दिखाई गई, जिसमें ट्रंप बाल-बाल बचे थे। संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया कि अगली बार वे सफल होंगे, जो किसी देश के आधिकारिक मीडिया द्वारा दी गई सबसे गंभीर धमकियों में से एक है।

ट्रंप का फांसी रुकने का दावा

बुधवार को राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया कि उन्हें "भरोसेमंद सूत्रों" से जानकारी मिली है कि ईरान में प्रदर्शनकारियों की फांसी और हत्याएं फिलहाल रुक रही हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे स्थिति पर कड़ी नजर रखे हुए हैं और अगर दमन जारी रहा तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा। ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया है कि "मदद आ रही है" और प्रशासन सैन्य विकल्पों की समीक्षा कर रहा है।

ईरान में जारी जनआक्रोश

दिसंबर 2025 से शुरू हुए विरोध प्रदर्शनों ने ईरान के 180 से अधिक शहरों को अपनी चपेट में ले लिया है, जिसका मुख्य कारण गिरती अर्थव्यवस्था और रियाल का अवमूल्यन है। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों की कार्रवाई में अब तक 2,500 से अधिक प्रदर्शनकारी मारे जा चुके हैं और हजारों को जेलों में डाल दिया गया है। सरकार इन प्रदर्शनों को विदेशी साजिश करार दे रही है और 'फास्ट-ट्रैक' अदालतों के जरिए सजा सुनाने की तैयारी में है।

क्षेत्रीय सैन्य हलचल

अमेरिका ने एहतियात के तौर पर मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अड्डों से कुछ गैर-जरूरी कर्मियों को हटाना शुरू कर दिया है, जबकि युद्धपोतों की तैनाती बढ़ाई जा रही है। जून 2025 में कतर के अल उदैद हवाई अड्डे पर हुए हमलों के बाद से ही क्षेत्र में तनाव उच्च स्तर पर बना हुआ है। ईरान ने भी चेतावनी दी है कि अगर उसके परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ, तो वह पूरे क्षेत्र में अमेरिकी हितों को निशाना बनाएगा।

वैश्विक कूटनीति की विफलता

G7 देशों और मानवाधिकार संस्थाओं ने ईरान में हो रहे 'मानवता के खिलाफ अपराधों' की निंदा की है और नए प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। दूसरी ओर, ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने इन विरोधों को शत्रु देशों द्वारा थोपा गया युद्ध बताया है और पीछे हटने से इनकार कर दिया है। वर्तमान परिस्थितियों में बातचीत की संभावना कम होती जा रही है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय एक बड़े सैन्य टकराव की आशंका से सहमा हुआ है।

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