सऊदी अरब ने ईरानी राजनयिकों को बाहर निकाला (सोर्स- सोशल मीडिया)
Saudi Iran Diplomatic Expulsion: सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा की, जिसमें कहा गया कि सऊदी अरब ने कई ईरानी राजनयिक कर्मचारियों को देश से निकाल दिया है और आगे भी कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है। मंत्रालय ने यह कदम ईरान पर क्षेत्रीय देशों खासकर गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (GCC) के सदस्य देशों और अन्य अरब व इस्लामी देशों पर लगातार हमले करने के आरोपों के बाद उठाया है।
सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें ‘ईरानी आक्रामकता की खुली मिसाल’ बताया। मंत्रालय का कहना था कि सऊदी अरब की संप्रभुता, नागरिकों के बुनियादी ढांचे, आर्थिक हितों और राजनयिक मिशनों को बार-बार निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और ‘अच्छे पड़ोसी’ होने के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
सऊदी अरब ने यह भी कहा कि ऐसे कार्य ‘बीजिंग घोषणा’ के खिलाफ हैं, जो इस्लाम के सिद्धांतों के प्रति ईरान की कथित प्रतिबद्धता को कमजोर करते हैं। मंत्रालय ने यह आरोप भी लगाया कि ईरान का व्यवहार उसकी कथनी के अनुरूप नहीं है।
बीजिंग घोषणा 2023 में सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनयिक संबंधों को बहाल करने के लिए एक समझौता था, जिसे चीन के मध्यस्थता से हासिल किया गया था। इस समझौते में दोनों देशों ने एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और सहयोग बढ़ाने का वादा किया था।
मंत्रालय ने चेतावनी दी कि यदि ईरान की आक्रामकता जारी रही, तो इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है, जो भविष्य में द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। सऊदी अरब ने अपनी पिछली चेतावनी का भी हवाला दिया, जो 9 मार्च 2026 को जारी की गई थी। मंत्रालय ने यह पुष्टि की कि ईरानी मिलिट्री अटैच, असिस्टेंट अटैच और दूतावास के तीन अन्य कर्मचारियों को ‘पर्सोना नॉन ग्रेटा’ घोषित कर 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दिया गया है।
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यह घटनाक्रम 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के ठिकानों पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद सामने आया, जिनमें भारी जान-माल का नुकसान हुआ था। इसके बाद, ईरान ने इजरायल और अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे, जिनमें बहरीन, इराक, जॉर्डन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के सैन्य अड्डे शामिल थे।