ईरान की सरकार से भी ज्यादा ताकतवर IRGC, खामेनेई की मौत के बाद मिडिल ईस्ट में खौफ का नया साया
IRGC Power Dynamics: ईरान का रिवोल्यूशनरी गार्ड अब सरकार से भी शक्तिशाली हो चुका है। खामेनेई की मौत के बाद स्वतंत्र ऑपरेशन और विशाल मिसाइल भंडार ने पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।
- Written By: प्रिया सिंह
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC (सोर्स- सोशल मीडिया)
Iran Revolutionary Guard Security Crisis: ईरान में आज एक ऐसी ताकत खड़ी हो गई है जो वहां की चुनी हुई सरकार से भी बड़ी लगती है। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC अब केवल एक सैन्य बल नहीं, बल्कि एक खौफनाक नेटवर्क बन चुका है। सुप्रीम लीडर खामेनेई की मौत के बाद इस संगठन की लगाम किसी के हाथ में नहीं दिख रही है। मिडिल ईस्ट के देशों में इस अनियंत्रित ताकत को लेकर अब गहरी चिंता और डर का माहौल बना हुआ है।
क्रांति से उपजा एक विशाल आर्थिक साम्राज्य
साल 1979 की इस्लामी क्रांति के दौरान इस गार्ड बल का गठन शिया धर्मगुरुओं की रक्षा के लिए किया गया था। धीरे-धीरे यह बल देश के नियमित सशस्त्र बलों के समानांतर खड़ा हो गया और अपनी ताकत बढ़ाता चला गया। आज यह संगठन न केवल मिसाइलों का मालिक है, बल्कि ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था में अपनी जड़ें जमा चुका है।
IRGC का आर्थिक साम्राज्य इतना बड़ा है कि यह निर्माण, सड़कों, बंदरगाहों और दूरसंचार जैसे क्षेत्रों को नियंत्रित करता है। इनके पास ‘खातम अल-अनबिया’ जैसी विशाल कंपनियां हैं जो लेजर आई सर्जरी तक की सेवाएं प्रदान करने का दावा करती हैं। यह पैसा और ताकत ही IRGC को ईरान की राजनीति में सरकार से भी अधिक प्रभावशाली और स्वतंत्र बनाती है।
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विनाशकारी हथियार और स्वतंत्र सैन्य फैसले
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के हालिया बयानों ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है क्योंकि नियंत्रण खत्म हो रहा है। खामेनेई की मौत के बाद IRGC की सैन्य इकाइयां अब अपनी मर्जी से पूरी तरह स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। यह स्थिति इसलिए खतरनाक है क्योंकि इनके पास दुनिया का एक बहुत ही विशाल मिसाइल और ड्रोन भंडार मौजूद है।
हाल ही में ओमान और कतर जैसे देशों पर हुए हमलों को सरकार की पसंद नहीं बल्कि सेना की मनमर्जी बताया गया है। जब कोई शक्तिशाली सेना बिना किसी केंद्रीय नेतृत्व के काम करने लगती है, तो वह पूरे क्षेत्र के लिए खतरा बन जाती है। खाड़ी देशों में इसी वजह से अब ईरान की इन स्वतंत्र सैन्य कार्रवाइयों को लेकर भारी नाराजगी और असुरक्षा देखी जा रही है।
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प्रतिरोध की धुरी और आंतरिक दमन का चेहरा
IRGC की कुड्स फोर्स ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ “एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस” तैयार किया है जो काफी दूर तक फैला है। यह संगठन सीरिया के असद और हिजबुल्लाह जैसे समूहों को समर्थन देकर अपनी ताकत को ईरान की सीमाओं से बाहर ले गया है। विदेशी धरती पर जासूसी और हमलों के आरोप भी इस खूंखार बल पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लगातार लगते रहे हैं।
ईरान के भीतर भी जब जनता शासन के खिलाफ सड़कों पर उतरती है, तो उसे दबाने के लिए ‘बसिज’ का इस्तेमाल किया जाता है। बसिज के सदस्य लाठियों और पेलेट गन्स से प्रदर्शनकारियों का दमन करते हैं, जिससे मानवता और शांति को चोट पहुंचती है। इसी खूनी दमन के चलते यूरोपीय संघ ने रिवोल्यूशनरी गार्ड को एक आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध कर दिया है।
