ईरान का तेल निर्यात जारी, युद्ध के बीच 16 मिलियन बैरल की बिक्री (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran Oil Export During War: मिडिल ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग और अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों के बीच एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है। युद्ध के दौरान ईरान का तेल निर्यात के ताजा आंकड़े बताते हैं कि ईरान का तेल व्यापार ठप होने के बजाय और बढ़ गया है। दुनिया को लग रहा था कि युद्ध से ईरान की अर्थव्यवस्था टूट जाएगी, लेकिन उसने नए रास्ते खोज लिए हैं। समुद्री डेटा के अनुसार ईरान ने अपनी व्यापारिक पाइपलाइन को पूरी तरह से सक्रिय रखा है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक ईरान ने मार्च की शुरुआत से अब तक करीब 16 मिलियन बैरल से ज्यादा तेल का निर्यात किया है। पश्चिमी देशों द्वारा लगाई गई तमाम पाबंदियों के बावजूद चीन इस तेल का सबसे बड़ा खरीदार बनकर दुनिया के सामने उभरा है। ईरान ने कूटनीतिक और गुप्त रास्तों का इस्तेमाल करके अपने मुनाफे और अर्थव्यवस्था को युद्ध के दौरान भी मजबूती से बचाए रखा है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री चोकपॉइंट माना जाता है, जहां से दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है। युद्ध छिड़ने के बाद यहां यातायात कम जरूर हुआ है, लेकिन अब तक करीब 90 जहाज इस रास्ते से सुरक्षित निकल चुके हैं। इनमें से कई जहाज अंतरराष्ट्रीय सरकारों की नजरों से बचकर और पाबंदियों को धता बताकर अपना सफर पूरा करने में सफल रहे हैं।
इस चुनौतीपूर्ण समय में न केवल ईरान बल्कि भारत और पाकिस्तान से जुड़े जहाज भी इस रास्ते को पार करने में सफल रहे हैं। भारत का जहाज ‘जग लाड़की’ 81 हजार टन क्रूड ऑयल लेकर सुरक्षित पहुंचा है, जबकि पाकिस्तान का टैंकर ‘कराची’ भी रास्ते में है। इन जहाजों की सफल आवाजाही दिखाती है कि युद्ध के बावजूद ऊर्जा की वैश्विक जरूरतें समुद्री रास्तों पर व्यापार को जारी रखे हुए हैं।
मार्च में युद्ध की शुरुआत के बाद से इस समुद्री इलाके में अब तक करीब 20 जहाजों पर हमले की खबरें भी आई हैं। युद्ध से पहले यहां हर दिन 100 से 135 जहाज गुजरते थे, लेकिन अब यह संख्या काफी घट गई है और जोखिम बढ़ गया है। इसके बावजूद ईरान और उसके व्यापारिक साझेदार इस खतरे को उठाकर भी अपना कारोबार धड़ल्ले से चलाने की कोशिश कर रहे हैं।
जैसे ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचीं, दुनिया भर में चिंता की लहर दौड़ गई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगी देशों पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है ताकि इस समुद्री रास्ते को फिर सुरक्षित बनाया जाए। तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकती हैं, जिसे नियंत्रित करना फिलहाल बड़ी चुनौती है।
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एनालिटिक्स फर्मों के अनुसार ईरान ने इस समुद्री रास्ते पर अपने रणनीतिक नियंत्रण का बहुत ही समझदारी और बखूबी के साथ इस्तेमाल किया है। उसने न केवल अपना तेल बेचा बल्कि अपने निर्यात के रास्तों को दुश्मनों के हमलों से सुरक्षित रखने के लिए गुप्त तरीके अपनाए। यह स्थिति दर्शाती है कि युद्ध के मैदान में बारूद बरसने के बाद भी व्यापारिक कूटनीति अपने रास्ते स्वयं तलाश लेती है।