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Explainer: मोसाद का एजेंट निकला ईरान का राष्ट्रपति! तख्तापलट की थी साजिश, कैसे फेल हुआ इजरायल का मास्टरप्लान?

Ahmadinejad Mossad Agent: अमेरिकी अखबार ने दावा किया है कि ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद मोसाद के संपर्क में एजेंट थे और उन्होंने इजरायल के साथ मिलकर ईरान में तख्तापलट की साजिश रची थी।

  • Written By: अक्षय साहू
Updated On: Jul 15, 2026 | 05:30 PM

महमूद अहमदीनेजाद पर मोसाद एजेंट होने का आरोप (AI जेनरेटेड इमेज)

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Mahmoud Ahmadinejad Mossad Agent Allegations: एक नेता जिसकी देशभक्ति की कसम पूरा मुल्क खाता था, जिसने दुनियाभर के प्रतिबंधों के बावजूद अपने लोगों को एक सपना दिखाया परमाणु बम बनाने का, और जिसने अमेरिका और इजरायल की आंखों में आंखे डालकर कहा कि वो जो सालों से मिडिल ईस्ट के साथ करते आ रहे हैं वो गलत है। लेकिन फिर एक दिन खबर आती है कि वही नेता देश के दुश्मानों के साथ मिल गया है और देश में तख्तापलट की तैयारी कर रहा है। 

हम बात कर रहें हैं ईरान के पूर्व राष्ट्रपति महमूद अहमदीनेजाद की। जिन्हें कभी देश की कट्टरपंथी  राजनीति का सबसे प्रभावशाली चेहरा माना जाता था और जो ईरान में सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई तक को लोकप्रियता के मामले में टक्कर देते थे। उन्हें लेकर अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। जिसमें दावा किया गया है कि अहमदीनेजाद असल में इजरायल के खुफिया एजेंसी मोसाद के एजेंट थे और वो ईरान में तख्तापलट की कोशिश कर रहे थे। आइए आपको बताते हैं कि कैसे महमूद अहमदीनेजाद मोसाद के एजेंट बने? अहमदीनेजाद के साथ ऐसा क्या हुआ था कि उन्होंने ईरान और इस्लामी देशों के सबसे बड़े दुश्मन इजरायल के साथ हाथ मिला लिया?  

अहमदीनेजाद और खामेनेई की दुश्मनी

एक समय में महमूद अहमदीनेजाद को अली खामेनेई का बेहद करीबी माना जाता था। 2005 में जब पहली बार अहमदीनेजाद ने राष्ट्रपति पद के लिए नामांकन किया, तो खामेनेई ने उनका खुलकर समर्थन किया था। इसका नतीजा ये हुआ कि अहमदीनेजाद की राष्ट्रपति चुनाव में एकतरफा जीत हुई। अहमदीनेजाद कुल दो बार ईरान के राष्ट्रपति रहे, इस दौरान उन्होंने ईरान के लिए कई बड़े काम किए। 

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अली खामेनेई के करीबी माने जाते थे महमूद अहमदीनेजाद (सोर्स- सोशल मीडिया)

अहमदीनेजाद ने अपने कार्यकाल में ईरान के परमाणु कार्यक्रम में तेजी लाई और यूरेनियम एनरिचमेंट झमता को बढ़ाया। जानकार मानते हैं कि अगर वो कुछ साल और राष्ट्रपति के पद पर रह जाते, तो हो सकता था कि ईरान अब तक परमाणु संपन्न देश होता। इस दौरान उनकी और आयतुल्लाह अली खामेनेई के बीच मतबेद की खबरें बाहर आने लगी।

खामेनेई ने की चुनाव न लड़ने की सलाह

साल 2016 में खामेनेई एक कार्यक्रम में भाषण दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने महमूद अहमदीनेजाद से 2017 में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में हिस्सा न लेने की सलाह दी। खामेनेई का तर्क था कि अहमदीनेजाद की उम्मीदवारी देश को राजनीतिक रूप से विभाजित कर सकती है। हालांकि, अहमदीनेजाद ने इस सलाह को नजरअंदाज करते हुए चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किया, लेकिन गार्जियन काउंसिल ने उनका पर्चा खारिज कर दिया।

खामेनेई के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ना चाहते थे अहमदीनेजाद (सोर्स- सोशल मीडिया)

अहमदीनेजाद ने इसके बाद 2021 और फिर 2025 में भी उनके चुनाव लड़ने की कोशिश सफल नहीं हो सकी। लगातार तीन बार चुनावी प्रक्रिया से बाहर किए जाने के बाद, उनके राजनीतिक भविष्य पर लगभग पूर्ण विराम लग गया। जानकारी के मुताबिक, यही वो 2021 ही वह समय था जब अहमदीनेजाद ने ईरान की कुर्सी पर कब्जा करने के लिए विदेशी ताकतों का सहारा लेने का सोचा और मोसाद के संपर्क में आए।

अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों की आड़ में सीक्रेट मीटिंग

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि मोसाद ने अहमदीनेजाद से सीक्रेट मीटिंग से लिए कथित तौर पर ट्रैक-टू डिप्लोमेसी’ का इस्तेमाल किया। इसमें इजरायल की मदद उसके करीबी देशों ग्वाटेमाला और हंगरी ने की। 

2023 में हुई पहली मुलाकात: दोनों पक्षों के बीच पहली मुलाकात साल 2023 में ग्वाटेमाला में हुई। अहमदीनेजाद यहां एक पर्यावरण सम्मेलन में शामिल होने के लिए पहुंचे थे। हालांकि, यह सम्मेलन सिर्फ दिखावे के लिए था। 

2024 में हंगरी में हुई दूसरी मुलाकात: इसके बाद 2024 में हंगरी की लूडोवीका यूनिवर्सिटी में जलवायु परिवर्तन पर आयोजित सम्मेलन के दौरान दूसरी बैठक हुई। यहां अहमदीनेजाद की मुलाकात सीधे मोसाद प्रमुख डेविड बर्निया से कराई गई। इसके बाद ही मोसाद ने इसकी जानकारी अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए को दी। 

मोसाद और अहमदीनेजाद के बीच मुलाकात का दावा (AI जेनरेटेड इमेज)

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अहमदीनेजाद की इन विदेश यात्राओं का खर्च भी मोसाद ने उठाया था। हालांकि इन दावों की पुष्टि किसी आधिकारिक स्रोत ने नहीं की है।

अहमदीनेजाद ने बदली अपनी छवि

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2021 में हुई मुलाकात के बाद महमूद अहमदीनेजाद ने अचानक अपनी छवि को बदलना शुरू कर दिया था। अहमदीनेजाद का नाम ईरान के सबसे कट्टरपंथी नेताओं में लिया जाता था। वो खुलकर इजरायल की आलोचना करते और इजरायल को मिटाने की बातें करते थे, लेकिन 2021 के बाद उन्होंने इजरायल की आलोचना करना कम कर दिया और 2025 आते-आते बंद ही कर दिया। अब अहमदीनेजाद के निशाने पर गार्जियन काउंसिल थी। 

आखिरी बार खामेनेई के जनाजे में नजर आए थे अहमदीनेजाद (सोर्स- सोशल मीडिया)

इसके अलावा वो ईरान के दूर-दराज बसे गांवों में जाते और लोगों की समस्याएं सुनते और उन्हें भरोसा दिलाते कि वो उनकी मदद करेंगे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि वो ये सब इसलिए कर रहे थे ताकि जब तख्तापलट हो तो जनता उनका विरोध न करें और आसानी से उन्हें अपना लें। 

तख्तापलट के बाद क्या था प्लान

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इजरायल का प्लान सफल हो जाता और अहमदीनेजाद ईरान की गद्दी पर काबिज हो जाते, इजरायल और ईरान के रिश्तों की कड़वाहट हमेशा के लिए खत्म हो जाती। रिपोर्ट के मुताबिक, अहमदीनेजाद न सिर्फ इजरायल को मान्यता देते बल्कि अब्राहम अकॉर्ड का भी हिस्सा बनते। हालांकि, इजरायल का प्लान फेल हो गया और अब अहमदीनेजाद को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने नजरबंद कर रखा है। 

क्यों फेल हुआ इजरायल का प्लान?

इजरायल के प्लान फेल होने को लेकर रिपोर्ट में दो प्रमुख कारण बताए गए हैं। 

पहला कारण यह बताया गया कि 28 फरवरी 2026 को इजरायल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया। जिसमें खामेनेई की मौत हो गई। इजरायल को उम्मीद थी कि इस हमले के बाद ईरानी जनता रिजीम के खिलाफ विद्रोह कर देगी और तख्तापलट हो जाएगा। लेकिन हमलों के बाद इसके उलटा हुआ, जो जनता खामेनेई और सरकार के खिलाफ थी वो उसके समर्थन में आ गई। जनता सड़कों पर तो उतरी लेकिन विद्रोह के लिए नहीं बल्कि ईरान सरकार का समर्थन में, यह इजरायल के लिए एक बड़ा झटका था। 

यह भी पढ़ें- ओमान जहाज हमले में पुणे के मरीन इंजीनियर हेरंब करमरकर की मौत, रोते हुए ससुर बोले- बस बेटे का शव लौटा दो सरकार

दूसरा कारण कुर्द लड़ाकों की कथित भूमिका को बताया गया। दावा किया गया कि पश्चिमी ईरान से समन्वित कार्रवाई के लिए उन्हें पहले से प्रशिक्षित किया गया था, लेकिन निर्धारित समय पर उन्होंने कोई बड़ा कदम नहीं उठाया। इससे पूरी रणनीति कमजोर पड़ गई और तख्तापलट नहीं हो पाया। जानकारी के मुताबिक, अहमदीनेजाद को ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने नजरबंद करते रखा है। उन्हें आखिरी बार खामेनेई के जनाजे में देखा गया था।

Iran former president ahmadinejad secret mossad agent coup plot explained

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Published On: Jul 15, 2026 | 05:16 PM

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