Iran Conflict: जंग के बीच ईरान में आंतरिक कलह, राष्ट्रपति की माफी से भड़के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स
Iran President Apology: ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान द्वारा पड़ोसी देशों से माफी मांगने के बाद देश में राजनीतिक घमासान मच गया है, जिससे कट्टरपंथी और IRGC कमांडर्स काफी नाराज हैं और हमले जारी हैं।
- Written By: प्रिया सिंह
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान (सोर्स-सोशल मीडिया)
Iran Government Military Internal Rift: ईरान में जारी भीषण युद्ध के बीच अब वहां की सत्ता के ऊंचे गलियारों में आपसी खींचतान और कलह की खबरें तेजी से बाहर आने लगी हैं। राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने पड़ोसी देशों से जो शांति और सुलह की अपील की थी, वह अब खुद उनके राजनीतिक करियर के लिए एक बड़ी मुसीबत बन गई है। देश के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने राष्ट्रपति के इस नरम और कूटनीतिक रुख को पूरी तरह से नकारते हुए अपनी कार्रवाई जारी रखी है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या ईरान की चुनी हुई सरकार और उसकी ताकतवर सेना अब दो अलग-अलग रास्तों पर चल रही हैं।
शांति की पहल और अपनों की नाराजगी
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने हाल ही में खाड़ी देशों से ईरानी कार्रवाइयों के कारण हुई क्षति के लिए व्यक्तिगत रूप से माफी मांगकर सबको हैरान कर दिया था। उन्होंने पड़ोसी मुल्कों को भरोसा दिया था कि ईरान उन पर और हमले नहीं करेगा, बशर्ते उनकी जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ हमलों के लिए न किया जाए। हालांकि, यह मानवीय पहल ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी खेमे और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडरों को रास नहीं आई और एक नया विवाद खड़ा हो गया।
सैन्य कमांडर्स का पलटवार और हमले
राष्ट्रपति की इस शांतिपूर्ण घोषणा के कुछ ही घंटों बाद IRGC ने खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर फिर से भीषण ड्रोन हमले शुरू कर दिए। शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने अबू धाबी के अल धाफरा एयर बेस और दुबई जैसे केंद्रों को निशाना बनाया जिसमें दुर्भाग्यवश एक व्यक्ति की जान चली गई। सैन्य कमांडरों का यह आक्रामक कदम राष्ट्रपति की शांति वार्ता को खुले तौर पर चुनौती देने और अपनी स्वतंत्र सैन्य ताकत का अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन करने जैसा है।
सम्बंधित ख़बरें
नवभारत संपादकीय: ईरान-अमेरिका तनाव का असर, गैस व तेल संकट की चुनौती से कैसे निपटें ?
Mexico पिरामिड स्थल पर अंधाधुंध गोलीबारी, एक कनाडाई पर्यटक की मौत और छह अन्य गंभीर रूप से घायल
US-ईरान जंग का असली विजेता कैसे बना China? बिना एक भी गोली चलाए मारी बाजी, जानें जिनपिंग के वो 5 मास्टरस्ट्रोक
US Iran Peace Talks: इस्लामाबाद में शांति की आखिरी कोशिश, हां-ना के बीच पाक पहुंच रहा अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल
दबाव में झुके राष्ट्रपति पेजेशकियान
देश के भीतर कट्टरपंथियों के बढ़ते भारी दबाव के कारण राष्ट्रपति के कार्यालय को मजबूरी में अपने पिछले बयान पर सफाई देनी पड़ी और कड़ा रुख अपनाना पड़ा। सोशल मीडिया पर अपने भाषण को दोबारा पोस्ट करते समय उन्होंने जानबूझकर ‘माफी’ शब्द को हटा दिया ताकि सेना और कट्टरपंथियों के गुस्से को शांत किया जा सके। लेकिन तब तक सांसद हामिद रसाई जैसे प्रभावशाली नेताओं ने उनके रुख को कमजोर, गैर-पेशेवर और राष्ट्रहित के खिलाफ बताकर सार्वजनिक रूप से तीखा हमला बोल दिया था।
यह भी पढ़ें: …तो इसलिए US को मुंहतोड़ जवाब दे रहा ईरान! पर्दे के पीछे से मिल रहा किसका सपोर्ट? जंग के बीच हुआ बड़ा खुलासा
सत्ता के भीतर बढ़ती खतरनाक दरार
ईरान के न्यायपालिका प्रमुख मोहसेनी-एजेई ने भी स्पष्ट कर दिया है कि जिन क्षेत्रीय देशों की जमीन का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ होगा, वहां जवाबी हमले जारी रहेंगे। इससे दुनिया के सामने यह कड़ा संदेश गया है कि ईरान की नेतृत्व परिषद और वहां की सेना के बीच राष्ट्रपति की कूटनीति को लेकर गहरे मतभेद हैं। जंग के इस कठिन दौर में ईरान का यह गंभीर आंतरिक संघर्ष आने वाले समय में न केवल देश की राजनीति बल्कि युद्ध की दिशा को भी प्रभावित करेगा।
