खाड़ी में पानी का हाहाकार! ईरान के हमले से कुवैत का डीसैलिनेशन प्लांट तबाह, क्या अब प्यासा मरेगा मिडिल ईस्ट?

Iran Kuwait Kuwait: ईरान के ड्रोन हमले में कुवैत के मुख्य डीसैलिनेशन प्लांट को भारी नुकसान पहुंचा है। कुवैत की 90% जल आपूर्ति इसी तकनीक पर निर्भर है, जिससे क्षेत्र में भीषण संकट की आशंका है।
Water Crisis in the Gulf! Iran's Attack Devastates Kuwait's 'Lifeline' Plant Will the Middle East Now Die of Thirst?
कुवैत के प्लांट पर अटैक, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
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Iran Attack On Kuwait Water Plant: मध्य-पूर्व में जारी संघर्ष अब एक ऐसे विनाशकारी मोड़ पर पहुंच गया है जहां युद्ध का निशाना केवल सैन्य ठिकाने नहीं बल्कि आम नागरिकों की बुनियादी जरूरतें भी बन रही हैं। शुक्रवार को कुवैत सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि ईरान के एक भीषण हमले में उसके महत्वपूर्ण डीसैलिनेशन प्लांट को गंभीर क्षति पहुंची है। यह हमला न केवल कुवैत के लिए एक बड़ा झटका है बल्कि पूरे खाड़ी क्षेत्र में पानी के लिए 'हाहाकार' मचने की शुरुआत मानी जा रही है।

ड्रोन हमले से दहला कुवैत

ताजा घटनाक्रम के अनुसार, शुक्रवार सुबह कुवैत की एक तेल रिफाइनरी पर ड्रोन से हमला किया गया जिसके ठीक बाद डीसैलिनेशन प्लांट को निशाना बनाया गया। हालांकि कुवैत ने अभी तक इस हमले से हुए नुकसान का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया है कि संयंत्र के कुछ प्रमुख हिस्सों को काफी नुकसान पहुंचा है। यह हमला उस समय हुआ है जब ईरान ने पहले ही अमेरिका के सहयोगियों को अपनी 'हिट लिस्ट' में शामिल करने की चेतावनी दी थी।

90 प्रतिशत पानी पर मंडराया खतरा

खाड़ी के अरब देशों के लिए डीसैलिनेशन तकनीक किसी 'लाइफलाइन' से कम नहीं है। कुवैत जैसे रेगिस्तानी इलाकों में लगभग 90 प्रतिशत पीने का पानी इसी प्रक्रिया के माध्यम से समुद्र के खारे पानी को शुद्ध करके प्राप्त किया जाता है,। पानी के इन स्रोतों पर होने वाले हमले सीधे तौर पर लाखों लोगों के दैनिक जीवन को पंगु बना सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन संयंत्रों को और नुकसान पहुंचता है तो पानी की समस्या पूरे क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी राष्ट्रीय सुरक्षा चुनौती बन जाएगी।

प्रतिशोध की आग और 'जैसे को तैसा' नीति

ईरान ने इस हमले को 'जैसे को तैसा' नीति का हिस्सा बताया है। शुरुआत में ईरान ने अमेरिका और इजरायल पर अपने बुनियादी ढांचों पर हमला करने का आरोप लगाया था जिसके बाद उसने खाड़ी देशों में मौजूद इन महत्वपूर्ण प्लांटों को निशाना बनाना शुरू कर दिया है। इससे पहले ईरान की अर्ध-सरकारी फार्स न्यूज एजेंसी ने 8 प्रमुख पुलों की सूची जारी की थी। जिनमें कुवैत का 'शेख जाबेर अल-अहमद अल-सबा सी ब्रिज' भी शामिल है। पुलों के बाद अब पानी के स्रोतों पर हमले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ईरान अब आर-पार की जंग के मूड में है।

वैश्विक स्तर पर खाद्य संकट की चेतावनी

युद्ध की इस आग का असर केवल पानी तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूरी दुनिया की रसोई तक पहुंच रहा है। संयुक्त राष्ट्र (UN) ने चेतावनी दी है कि इस तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर खाद्य पदार्थों की कीमतों में भारी उछाल देखा जा रहा है। मार्च महीने में दुनिया भर में खाने की कीमतें लगातार दूसरे महीने बढ़ी हैं और दिसंबर के बाद से अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।

FAO फूड प्राइस इंडेक्स के अनुसार, कीमतें फरवरी के मुकाबले 2.4 प्रतिशत अधिक हो गई हैं। यदि यह संघर्ष और फैला तो न केवल खाड़ी बल्कि पूरी दुनिया को भीषण आर्थिक मंदी और खाद्य किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

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