

Indus Water Treaty Dispute: किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने एक बार फिर सिंधु जल समझौते का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाया। जम्मू-कश्मीर के रातले जलविद्युत परियोजना को लेकर हेग स्थित मध्यस्थता अदालत के फैसले पर भारत के सख्त रुख के बीच शरीफ ने साझा जल संसाधनों को क्षेत्र की जीवन रेखा बताते हुए समझौतों के पालन की अपील की।
SCO सम्मेलन को संबोधित करते हुए शहबाज शरीफ ने कहा कि पानी दक्षिण एशिया और पूरे क्षेत्र के करोड़ों लोगों के लिए जीवन रेखा है। उन्होंने कहा कि साझा जल संसाधनों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों का सभी पक्षों को बिना किसी शर्त के सम्मान करना चाहिए।
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पानी को राजनीतिक दबाव बनाने या किसी देश के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव लगातार बना हुआ है।
पाकिस्तान ने यह मुद्दा ऐसे समय में उठाया है, जब भारत ने 31 अगस्त को हेग स्थित मध्यस्थता अदालत के फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 1960 का सिंधु जल समझौता लागू है और इससे जुड़े प्रावधानों का पालन किया जाना चाहिए।
यह विवाद मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर में चिनाब नदी पर बन रही रातले जलविद्युत परियोजना को लेकर है। भारत का रुख है कि जिस मध्यस्थता प्रक्रिया के तहत यह फैसला आया, उसका गठन भारत की सहमति के बिना हुआ और इसलिए वह भारत के लिए बाध्यकारी नहीं है।
भारत ने स्पष्ट किया है कि उसके संप्रभु अधिकारों और परियोजनाओं से जुड़े मामलों में किसी ऐसी प्रक्रिया को स्वीकार नहीं किया जा सकता, जिसे वह वैध नहीं मानता।
शहबाज शरीफ ने SCO मंच का इस्तेमाल जल सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के मुद्दे को प्रमुखता से उठाने के लिए किया। पाकिस्तान लंबे समय से सिंधु नदी प्रणाली पर अपनी कृषि और जल जरूरतों के कारण भारत के फैसलों को लेकर चिंता जताता रहा है।
भारत का कहना है कि वह संधि के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर रहा है और अपनी परियोजनाओं को राष्ट्रीय हितों के अनुसार आगे बढ़ा रहा है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जल परियोजनाओं और समझौते की व्याख्या को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
सिंधु जल समझौते का मुद्दा ऐसे समय में फिर चर्चा में आया है, जब भारत और पाकिस्तान के संबंध पहले से ही कई राजनीतिक और सुरक्षा मुद्दों को लेकर तनावपूर्ण हैं। पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर जल समझौते का मुद्दा उठाता रहा है, जबकि भारत लगातार आतंकवाद और सीमा पार सुरक्षा चुनौतियों को प्रमुख चिंता बताता है।
अब SCO शिखर सम्मेलन में शहबाज शरीफ के बयान और हेग कोर्ट के फैसले पर भारत के रुख ने सिंधु जल विवाद को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है। आने वाले समय में दोनों देशों की कूटनीतिक रणनीति इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।