

Indonesia Mount Dukono Volcano Eruption: इंडोनेशिया के हमाहेरा द्वीप पर शुक्रवार सुबह करीब 7:41 बजे माउंट डुकोनो ज्वालामुखी में भीषण विस्फोट हुआ। जिससे आसमान में 10 किलोमीटर की ऊंचाई तक राख का गुबार छा गया। इस अचानक आई आपदा की वजह से तीन लोगों की मौत हो गई है और इलाके में हड़कंप मच गया है। जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।
स्थानीय अधिकारियों और पुलिस प्रमुख के अनुसार, इस दुखद घटना में अब तक 3 पर्वतारोहियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। इनमें से दो लोग सिंगापुर के नागरिक हैं जबकि एक स्थानीय निवासी है जो पूर्वी इंडोनेशिया के टेरनाटे द्वीप का रहने वाला था। दुखद बात यह है कि अभी भी लगभग 10 से 20 पर्वतारोही पहाड़ी पर फंसे हुए हैं, जिन्हें सुरक्षित निकालने के लिए रेस्क्यू टीमें लगातार मशक्कत कर रही हैं। फंसे हुए लोगों में भी कई सिंगापुर के नागरिक बताए जा रहे हैं।
जांच में यह बात सामने आई है कि ज्वालामुखी की बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए वैज्ञानिकों ने 17 अप्रैल से ही इस पूरे क्षेत्र को पर्यटकों के लिए बंद कर दिया था। ज्वालामुखी विज्ञान और भूवैज्ञानिक आपदा-शमन केंद्र (PVMBG) ने इसको लेकर साफ निर्देश दिए थे कि कोई भी व्यक्ति ज्वालामुखी के गड्ढे के 4 किलोमीटर के दायरे में न आए। दिसंबर में ही इस संबंध में अलर्ट जारी किया गया था। इसके बावजूद पर्वतारोहियों का समूह इस प्रतिबंधित क्षेत्र में मौजूद था।
माउंट डुकोनो इंडोनेशिया के सबसे खतरनाक और सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक माना जाता है। रिकॉर्ड्स के अनुसार, यह साल 1933 से लगातार फट रहा है। यह अक्सर सल्फर डाइऑक्साइड के जहरीले गुबार और राख उगलता रहता है। हालांकि यह क्षेत्र मुख्य यात्रा मार्गों से काफी दूर है फिर भी साहसिक ट्रैकिंग के शौकीन यहां अक्सर पहुंच जाते हैं। इससे पहले 6 अप्रैल को भी इसमें विस्फोट हुआ था लेकिन उस समय किसी के हताहत होने की खबर नहीं थी।
फिलहाल माउंट डुकोनो को इंडोनेशिया की 4-स्तरीय चेतावनी प्रणाली के तीसरे सबसे ऊंचे अलर्ट स्तर पर रखा गया है। राहत की बात यह है कि इतनी भारी मात्रा में राख निकलने के बावजूद अभी तक विमान सेवाओं और उड़ानों में किसी तरह का कोई खास असर नहीं हुआ है। प्रशासन अब तेजी से बचाव कार्यों में जुटा है ताकि फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके और जान-माल के नुकसान को कम किया जा सके।