

India US pulses trade deal 2026 update: भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौता अब अपने अंतिम और निर्णायक चरण में पहुंच गया है, लेकिन दालों पर लगे टैरिफ ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। भारत दुनिया में दालों का सबसे बड़ा उपभोक्ता है, जो वैश्विक खपत का लगभग 27 प्रतिशत हिस्सा अकेले इस्तेमाल करता है।
इस विशाल बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए अमेरिकी सीनेटरों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर भारतीय टैरिफ कम कराने की अपील की है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के अनुसार, दोनों देश समझौते के बहुत करीब हैं और शेष मुद्दों को सुलझाने के लिए टीमें लगातार वर्चुअल बैठकें कर रही हैं।
मोंटाना के सीनेटर स्टीव डेन्स और नॉर्थ डकोटा के केविन क्रेमर ने 16 जनवरी 2026 को राष्ट्रपति ट्रंप को एक साझा पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने मांग की है कि अमेरिकी दलहन, विशेषकर पीली मटर पर भारत द्वारा लगाए गए 30 प्रतिशत आयात शुल्क को तत्काल हटवाया जाए। सीनेटरों का तर्क है कि इस भारी टैरिफ के कारण अमेरिकी किसानों को भारतीय बाजार में प्रतिस्पर्धी नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका मानना है कि मोंटाना और नॉर्थ डकोटा जैसे राज्यों के उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए भारत एक अनिवार्य गंतव्य है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत ने यह 30 प्रतिशत टैरिफ अक्टूबर 2025 में लगाया था, जिसे अमेरिका द्वारा भारतीय सामानों पर लगाए गए 50 प्रतिशत दंडात्मक शुल्क के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। सीनेटरों ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत से ही इसका समाधान निकल सकता है। मोंटाना और नॉर्थ डकोटा अमेरिका में मटर और दालों के शीर्ष दो उत्पादक राज्य हैं, जिनका निर्यात अब भारत के इस फैसले से काफी गिर गया है।
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि भारत और अमेरिका व्यापार समझौते को पूरा करने के बेहद करीब हैं और बातचीत कभी नहीं रुकी है। यद्यपि अमेरिका ने भारत के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है, फिर भी भारतीय निर्यात हर महीने लगभग 7 अरब डॉलर बना हुआ है। सरकार का ध्यान इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा जैसे क्षेत्रों पर है, जहां निर्यात में सकारात्मक वृद्धि देखी जा रही है। एक बार जब दोनों पक्ष सभी बिंदुओं पर सहमत हो जाएंगे, तो इस ऐतिहासिक ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा कर दी जाएगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर टैरिफ कम होता है, तो इससे न केवल अमेरिकी किसानों को राहत मिलेगी, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं को भी सस्ती दालें उपलब्ध होंगी। दालें भारत में प्रोटीन का मुख्य स्रोत हैं, विशेष रूप से मसूर, चना और मटर की खपत यहां सबसे अधिक है। अमेरिका अपने ट्रेड सरप्लस को संतुलित करने के लिए भारत पर कृषि और ऊर्जा क्षेत्र में अधिक रियायतें देने का दबाव बना रहा है। आगामी हफ्तों में होने वाली उच्च स्तरीय बैठकें इस विवाद का रुख तय करेंगी।