ट्रंप का नया 'शांति बोर्ड': क्या संयुक्त राष्ट्र की जगह लेगा यह नया वैश्विक संगठन?

Trump Peace Board Plan: ट्रंप ने 'शांति बोर्ड' का गठन कर संयुक्त राष्ट्र के विकल्प का संकेत दिया। इसमें अजय बंगा और टोनी ब्लेयर जैसे नेता शामिल हैं, लेकिन रूस, चीन और इजरायल ने आपत्तियां जताई है।
Trump's New 'Peace Board': A Global Alternative to the UN for Conflict Resolution?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
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Board of Peace vs United Nations: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने "शांति बोर्ड" (Board of Peace) के गठन के साथ वैश्विक कूटनीति में एक नई बहस छेड़ दी है। यह बोर्ड, जिसे प्रारंभ में गाजा युद्ध को समाप्त करने के लिए एक तंत्र के रूप में पेश किया गया था, अब अन्य अंतरराष्ट्रीय संकटों को हल करने की व्यापक महत्वाकांक्षाओं के साथ आगे बढ़ रहा है।

ट्रंप का यह कदम संयुक्त राष्ट्र (UN) की पारंपरिक भूमिका को सीधे चुनौती दे सकता है, क्योंकि इसमें प्रभावशाली वैश्विक नेताओं और निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। राष्ट्रपति ट्रंप का मानना है कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की वर्तमान अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था अब वैश्विक संघर्षों को सुलझाने में प्रभावी नहीं रही है, इसलिए एक "साहसी नए दृष्टिकोण" की आवश्यकता है।

बोर्ड का विस्तारित स्वरूप

ट्रंप ने अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई और पैराग्वे के नेता सैंटियागो पेना जैसे नेताओं को बोर्ड के "संस्थापक सदस्य" बनने के लिए आमंत्रित किया है। ट्रंप की 20-सूत्रीय गाजा युद्धविराम योजना को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन प्राप्त है, लेकिन बोर्ड का कार्य अब केवल गाजा तक सीमित नहीं रहेगा। ट्रंप इसे एक "नए अंतरराष्ट्रीय संगठन" के रूप में स्थापित करना चाहते हैं, जो दुनिया भर में शांति और शासी प्रशासन के रूप में काम कर सके।

शक्तिशाली टीम और सदस्य

इस बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं। इसके अलावा ट्रंप के करीबी सलाहकार स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर भी इसका हिस्सा हैं। अन्य नेताओं में तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन और मिस्र के राष्ट्रपति सिसी को भी निमंत्रण भेजे गए हैं, जिससे यह संगठन एक बहुपक्षीय शक्ति केंद्र के रूप में उभर रहा है।

रूस और चीन का विरोध

संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में शांति बोर्ड का उदय निश्चित रूप से रूस और चीन जैसे देशों के लिए चिंता का विषय होगा। सुरक्षा परिषद में वीटो पावर रखने वाले ये देश किसी भी ऐसे बदलाव का विरोध करेंगे जो अमेरिका के नेतृत्व वाली नई व्यवस्था को स्थापित करे। छोटे देशों को भी डर है कि इस नई प्रणाली में उनकी आवाज दब सकती है, क्योंकि वर्तमान संयुक्त राष्ट्र प्रणाली उन्हें कम से कम अपनी बात रखने का मंच प्रदान करती है।

संयुक्त राष्ट्र बनाम शांति बोर्ड

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों के प्रति दुनिया भर में बढ़ती निराशा इस नए बोर्ड की सफलता का आधार बन सकती है। यद्यपि आधिकारिक तौर पर इसे संयुक्त राष्ट्र का प्रतिस्थापन नहीं कहा गया है, लेकिन इसके उद्देश्य और कार्यप्रणाली इसे एक समानांतर और अधिक सक्रिय संस्था के रूप में पेश करते हैं। यह बोर्ड गाजा में सुरक्षा, विसैन्यीकरण और पुनर्निर्माण के लिए सीधे तौर पर उत्तरदायी होगा, जो कि यूएन की तुलना में अधिक कार्यकारी भूमिका है।

इजरायल की आपत्तियां

दिलचस्प बात यह है कि ट्रंप के करीबी सहयोगी इजरायल ने भी बोर्ड के कुछ सदस्यों और निर्णयों पर आपत्ति जताई है। इजरायल का कहना है कि "गाजा कार्यकारी समिति" का गठन उनके साथ पूर्ण समन्वय के बिना किया गया है। यद्यपि समिति में इजरायली व्यवसायी याकिर गाबे को शामिल किया गया है, लेकिन किसी सरकारी अधिकारी की अनुपस्थिति ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू की चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिन्होंने इस मुद्दे पर मार्को रुबियो से संपर्क करने के निर्देश दिए हैं।

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