भारत-अमेरिका के बीच 'पैक्स सिलिका' समझौता (सोर्स-सोशल मीडिया)
Indo-US Strategic AI Alliance: भारत और अमेरिका ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक ‘यू.एस.-इंडिया AI अवसर साझेदारी’ का ऐलान किया है। यह समझौता दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग को एक नई और शक्तिशाली दिशा प्रदान करने के लिए किया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की साझा दृष्टि के तहत इसे ‘पैक्स सिलिका’ ढांचे का हिस्सा बनाया गया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भविष्य की AI चुनौतियों को डर के बजाय विकास के बड़े अवसर के रूप में देखना है।
भारत और अमेरिका ने मिलकर तकनीकी क्षेत्र में एक नई क्रांति की शुरुआत की है जिसे ‘पैक्स सिलिका’ नाम दिया गया है। इस समझौते के तहत दोनों देश AI की भौतिक बुनियाद जैसे महत्वपूर्ण खनिज और सेमीकंडक्टर निर्माण पर विशेष ध्यान देंगे। यह साझेदारी भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ऊर्जा और कंप्यूटिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
दोनों देशों का मानना है कि AI का विकास भरोसेमंद सहयोग और मुक्त उद्यम के सिद्धांतों पर ही आधारित होना चाहिए। इसके लिए एक ऐसा पारदर्शी वातावरण तैयार किया जाएगा जो आर्थिक सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को निरंतर प्रोत्साहित कर सके। इस पहल के माध्यम से स्टार्टअप्स और डेवलपर्स को AI सिस्टम के परीक्षण और विस्तार के लिए पर्याप्त संसाधन प्राप्त होंगे।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘ट्रस्ट’ पहल के माध्यम से अपने रणनीतिक संबंधों को काफी मजबूती दी है। इस विजन के तहत दोनों देशों ने AI को एक ऐसे अवसर के रूप में देखा है जो मानवता के विकास में बहुत सहायक होगा। उनका मानना है कि स्वतंत्र दुनिया के लिए सबसे बड़ा खतरा AI की प्रगति नहीं बल्कि इसमें नेतृत्व न कर पाना है।
सहयोग के इस ढांचे के तहत अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को विशेष रूप से बढ़ावा देने की योजना भी बनाई गई है। इसके साथ ही कुशल कार्यबल के विकास के लिए दोनों देश मिलकर शैक्षणिक और तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों का विस्तार करेंगे। AI सहयोग की इन प्राथमिकताओं में एक विश्वसनीय सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना भी मुख्य रूप से शामिल है।
AI क्रांति को सफल बनाने के लिए निजी क्षेत्र की रचनात्मक शक्ति को सबसे बड़ा चालक या इंजन माना गया है। दोनों देश सीमा-पार वेंचर कैपिटल प्रवाह और अगली पीढ़ी के डाटा सेंटरों में निवेश बढ़ाने के लिए मिलकर काम करेंगे। इससे अगली पीढ़ी के प्रोसेसर और कंप्यूटिंग संसाधनों तक पहुंच आसान होगी जिससे नए AI मॉडल विकसित किए जा सकेंगे।
निजी कंपनियों को प्रोत्साहित करने के लिए नियामक ढांचे को सरल और निवेश के अनुकूल बनाने पर विशेष जोर दिया गया है। इससे कोडर और प्लेटफॉर्म्स को सुरक्षित AI सिस्टम विकसित करने और उन्हें वैश्विक स्तर पर ले जाने का अवसर मिलेगा। इस साझेदारी का लक्ष्य AI एप्लिकेशन्स के विकास में एक साझा और मजबूत मंच तैयार करना है।
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दुनिया के सबसे पुराने और सबसे बड़े लोकतंत्र होने के नाते अमेरिका और भारत ने समृद्धि की दिशा में साथ खड़े होने का संकल्प लिया है। दोनों देशों ने स्पष्ट किया है कि AI का भविष्य ऐसा होना चाहिए जो नागरिकों की सेवा करे और अर्थव्यवस्था को मजबूती दे। यह साझेदारी स्वतंत्रता, खुलापन और विधि के शासन जैसे साझा मानवीय मूल्यों को गहराई से प्रतिबिंबित करती है।
सामाजिक सामंजस्य की दिशा में भी यह समझौता एक मील का पत्थर साबित होगा क्योंकि यह तकनीक को आम लोगों के हित में उपयोग करेगा। AI के माध्यम से दोनों राष्ट्र न केवल अपनी सीमाओं की रक्षा करेंगे बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी काम करेंगे। यह समझौता वैश्विक स्तर पर AI के नैतिक और सुरक्षित उपयोग के लिए एक नया मानक स्थापित करने वाला है।
Ans: इसका मुख्य उद्देश्य AI, महत्वपूर्ण खनिजों, ऊर्जा और सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक सहयोग को बढ़ाना है।
Ans: यह पहल अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई रणनीतिक तकनीकी दृष्टि पर आधारित है।
Ans: इसमें AI की बुनियाद माने जाने वाले महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा अवसंरचना, कंप्यूटिंग क्षमता और सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र पर ध्यान दिया गया है।
Ans: निजी क्षेत्र वेंचर कैपिटल प्रवाह, अनुसंधान साझेदारी और अगली पीढ़ी के डाटा सेंटरों व प्रोसेसर के विकास के माध्यम से इस क्रांति का नेतृत्व करेगा।
Ans: दोनों देश AI को डर के बजाय एक अवसर के रूप में देखते हैं और मानते हैं कि इसमें नेतृत्व करना स्वतंत्र दुनिया के लिए अनिवार्य है।