भारत-चीन के बीच दूरियों हो रही है खत्म, 5 साल बाद चीनी नागरिकों को मिलेगा वीजा
India-China Relations: भारत ने पांच साल बाद चीनी नागरिकों को पर्यटक वीजा देने का फैसला लिया है। 2019 में कोविड महामारी और 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद इस पर रोक लगा दी गई थी।
- Written By: अक्षय साहू
चीनी नागरिकों के पर्यकट विजा देगा भारत (फोटो- सोशल मीडिया)
India-China Relations: भारत सरकार ने चीन के साथ रिश्ते सुधारने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने पांच साल के लंबे अंतराल के बाद एक बार फिर चीनी नागरिकों को पर्यटक विजा देने का ऐलान किया है। 2019 कोविड महामारी के चलते इस पर रोक लगा दी गई थी। यह प्रकिया 24 जुलाई 2025 से शुरू की जाएगी।
बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। दूतावास ने बताया कि, बीजिंग स्थित भारतीय वीजा केंद्र में पासपोर्ट वापसी के लिए आवेदन करने पर एक विधिवत ‘पासपोर्ट विदड्रॉल लेटर’ जरूरी होगा। कोविड-19 महामारी और जून 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीनी सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद दोनों देशों के बीच यात्राएं और आपसी संपर्क लगभग ठप हो गए थे। पिछले कुछ सालों में चीन ने भारतीय छात्रों और व्यापारियों को वीजा देना शुरू किया।
गलवान घटना के बाद आई रिश्तों खटास
जून 2020 में गलवान घाटी की झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था। 1962 के युद्ध के बाद यह पहली बार था जब हालात इतने नाजुक हो गए थे। हालांकि, बाद में दोनों देशों की सेनाओं के बीच कई दौर की कूटनीतिक बातचीत हुई, जिसके चलते पैंगोंग झील, गलवान और हॉट स्प्रिंग्स जैसे तनावपूर्ण इलाकों से सैनिकों की वापसी संभव हो सकी।
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इसके बाद अक्टूबर 2024 में देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों से भी सेनाएं हटाने का समझौता हुआ। इस फैसले के कुछ दिन बाद ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने रूस के कजान में बैठक की। जिसमें द्विपक्षीय रिश्तों को पटरी पर लाने के लिए कई अहम फैसले लिए गए।
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रिश्ते सुधारने पर फोकस
पांच साल की तनातनी के बाद अब भारत और चीन आपसी संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। दोनों देश लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, जिसके तहत सीधी उड़ानें शुरू करने की बात कही गई है। साथ ही, कोविड के चलते बंद हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया गया है। हाल ही में चीन दौरे के दौरान विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी यह संकेत दिया कि भारत-चीन संबंध धीरे-धीरे सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
