AMCA प्रोजेक्ट पर संकट के बादल! जानिए क्यों मुश्किल में पड़ सकता है भारत का ड्रीम फाइटर जेट

AMCA Project Update: भारत के स्वदेशी 5th जेनरेशन लड़ाकू विमान AMCA प्रोजेक्ट को इंजन की कीमतों में भारी उछाल के कारण झटका लगा है। अमेरिकी इंजन महंगा होने के बाद DRDO अब नए विकल्पों पर विचार कर रहा है।
Clouds of uncertainty over the AMCA project! Find out why India's dream fighter jet could face trouble.
सांकेतिक एआई फोटो
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India Stealth Fighter Jet AMCA Project: भारत के सबसे महत्वाकांक्षी रक्षा कार्यक्रम 'एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट' (AMCA) के निर्माण में एक बड़ी बाधा सामने आई है। देश के पहले स्वदेशी 5th जेनरेशन के स्टील्थ लड़ाकू विमान के लिए चुने गए अमेरिकी इंजन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी कंपनी GE Aerospace के F414 इंजन की लागत पहले के अनुमान से करीब तीन गुना तक बढ़ गई है। इस अचानक आई वित्तीय चुनौती के कारण रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने अब दूसरे इंजन विकल्पों की तलाश शुरू कर दी है।

AMCA Mk1 के लिए क्यों जरूरी है F414 इंजन?

AMCA भारत का अत्याधुनिक 5th जेनरेशन का स्वदेशी स्टील्थ लड़ाकू विमान है, जिसे दुश्मन के रडार से बचकर गहराई तक हमला करने के लिए विकसित किया जा रहा है। विमान के शुरुआती संस्करण, जिसे AMCA Mk1 कहा जाता है, के लिए GE के F414-INS6 इंजन को चुना गया था। यह इंजन शुरुआती 2 से 4 स्क्वाड्रन (लगभग 60 से 70 विमानों) के लिए निर्धारित किया गया था। इस विमान में कम रडार पहचान, लंबी दूरी तक तेज उड़ान और अंदरूनी हथियार रखने जैसी आधुनिक खूबियां शामिल हैं।

बढ़ती लागत और प्रोटोटाइप का पेच

इंजन की कीमतों में आई उछाल ने DRDO और रक्षा मंत्रालय की चिंताएं बढ़ा दी हैं। पहले एक F414 इंजन की अनुमानित कीमत करीब 70 से 80 करोड़ रुपये थी, लेकिन अब यह लागत काफी बढ़ चुकी है। वर्तमान में एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) पांच AMCA प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए 15 इंजनों की खरीद पर बातचीत कर रही है। चूंकि AMCA एक ट्विन-इंजन विमान है, इसलिए प्रत्येक प्रोटोटाइप के लिए दो ऑपरेशनल और एक अतिरिक्त इंजन की आवश्यकता होती है। रक्षा मंत्रालय ने इन प्रोटोटाइप के निर्माण के लिए टाटा और लार्सन एंड टुब्रो जैसी बड़ी निजी कंपनियों को निविदा भी जारी की है।

कीमतों में वृद्धि की वजह और स्वदेशी उत्पादन

विशेषज्ञों के अनुसार, रक्षा क्षेत्र में बढ़ती महंगाई और वैश्विक सप्लाई चेन का संकट इस मूल्य वृद्धि के पीछे मुख्य कारण हैं। एयरोस्पेस क्षेत्र के विशेष कच्चे माल और पुर्जों की कमी के कारण उत्पादन लागत में भी तेजी आई है। हालांकि, GE Aerospace और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के बीच तकनीकी समझौता हो चुका है और 2029 तक भारत में पहला 'मेड इन इंडिया' F414 इंजन तैयार करने का लक्ष्य है, जो LCA Mk2 विमानों में उपयोग होगा। इसके लिए GE ने भारत में असेंबली लाइन लगाने हेतु लगभग 6,000 करोड़ रुपये की मांग की है।

अमेरिकी इंजन की बढ़ती लागत के बीच भारत के पास अन्य आकर्षक विकल्प भी मौजूद हैं। फ्रांस की कंपनी Safran और ब्रिटेन की रोल्स-रॉयस ने भारत को 100 प्रतिशत तकनीक हस्तांतरण (ToT) और IP Rights देने की पेशकश की है। भारत की प्राथमिकता अब AMCA Mk2 के लिए अधिक शक्तिशाली और स्वदेशी तकनीक पर आधारित इंजन विकसित करने की है, ताकि भविष्य में विदेशी इंजनों पर निर्भरता को पूरी तरह खत्म किया जा सके।

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