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भारत-कोरिया जहाज निर्माण साझेदारी: ऊर्जा शिपिंग मांग को पूरा करने के लिए निर्माण साझेदारी की तलाश

India-South Korea: भारत और दक्षिण कोरिया ने कोरियाई तकनीक को भारत के विनिर्माण और कम लागत के साथ मिलाकर, बढ़ती ऊर्जा शिपिंग जरूरतों और वैश्विक बाजार के लिए जहाज बनाने की एक बड़ी साझेदारी पर चर्चा की।

  • By प्रिया सिंह
Updated On: Nov 14, 2025 | 05:34 PM

भारत और दक्षिण कोरिया (सोर्स - सोशल मीडिया)

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India and South Korea: भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है, जिसके चलते तेल, गैस और अन्य ऊर्जा उत्पादों के शिपिंग की मांग में भारी वृद्धि हो रही है। वर्तमान में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर समुद्री आयात पर निर्भर है, लेकिन इस माल को ढोने वाले अधिकांश जहाज विदेशी हैं। इस बड़ी जरूरत को पूरा करने के लिए, भारत ने दक्षिण कोरिया के साथ एक जहाज निर्माण साझेदारी पर चर्चा की है, जो अपनी उन्नत प्रौद्योगिकी के लिए जाना जाता है। इस सहयोग का उद्देश्य कोरियाई विशेषज्ञता को भारत के विनिर्माण आधार और कम लागत के साथ जोड़कर एक मजबूत और आत्मनिर्भर शिपिंग उद्योग बनाना है।

उन्नत शिपिंग तकनीक और आत्मनिर्भरता की तलाश

पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने हाल ही में दक्षिण कोरिया की प्रमुख शिपिंग कंपनियों के नेताओं के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में चर्चा का मुख्य केंद्र यह था कि कोरिया की उन्नत जहाज निर्माण प्रौद्योगिकी को भारत के मजबूत विनिर्माण आधार और कम लागत के साथ किस तरह से मिलाया जाए। यह साझेदारी न केवल भारत की घरेलू जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि इसे वैश्विक जहाज बाजार में भी एक महत्वपूर्ण स्थान दिला सकती है।

भारत हर साल समुद्री मार्ग से लगभग 150 अरब डॉलर से अधिक मूल्य का कच्चा तेल और गैस आयात करता है। यह विशाल व्यापार देश में ऊर्जा और शिपिंग जहाजों की भारी और लगातार बढ़ती मांग को दर्शाता है। वर्तमान में तेल और गैस क्षेत्र भारत के कुल व्यापार का लगभग 28 प्रतिशत है, लेकिन दुख की बात यह है कि इस माल का केवल लगभग 20 प्रतिशत ही भारतीय ध्वज वाले या स्वामित्व वाले जहाजों पर ढोया जाता है। इस अंतर को पाटने के लिए देश को बड़े और आधुनिक जहाजों की तत्काल आवश्यकता है।

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बढ़ती मांग और सरकारी पहल

कच्चे तेल, एलपीजी (LPG), एलएनजी (LNG) और ईथेन (Ethane) जैसे एनर्जी प्रोडक्ट्स की मांग भारत में तेज़ी से बढ़ रही है। सरकारी संस्था ओएनजीसी (ONGC) को अकेले 2034 तक लगभग 100 अपतटीय सेवा और आपूर्ति जहाजों की आवश्यकता होने की उम्मीद है। इस बढ़ती मांग को देखते हुए, सरकार ने वैश्विक पार्टनर्स के साथ मिलकर भारत में जहाज बनाने पर जोर दिया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ के दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मंत्री पुरी ने कोरिया ओशन बिज़नेस कॉर्पोरेशन (Korea Ocean Business Corporation), एसके शिपिंग (SK Shipping), एच-लाइन शिपिंग (H-Line Shipping) और पैन ओशन (Pan Ocean) के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से मुलाकात की। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऊर्जा और समुद्री जहाज, प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के दो प्रमुख स्तंभ हैं।

भारत सरकार ने देश के जहाज निर्माण उद्योग को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के लिए कई बड़ी योजनाएं शुरू की हैं। सितंबर 2025 में, सरकार ने 69,725 करोड़ रुपये की व्यापक जहाज निर्माण और समुद्री सुधार योजनाओं की घोषणा की है, जिनमें प्रमुख रूप से तीन फंड शामिल हैं.

  • जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना (₹24,736 करोड़): इसका उद्देश्य घरेलू विनिर्माण और जहाज-तोड़ने (Ship-breaking) को सहायता देना है।
  • समुद्री विकास निधि (₹25,000 करोड़): यह निवेश और प्रोत्साहन पर केंद्रित है।
  • जहाज निर्माण विकास योजना (₹19,989 करोड़): यह जहाज निर्माण समूहों के लिए पूंजीगत सहायता, जोखिम कवरेज और क्षमता निर्माण प्रदान करती है।

जहाज निर्माण बनेगा अर्थव्यवस्था का इंजन

जहाज निर्माण को ‘भारी इंजीनियरिंग की जननी’ कहा जाता है क्योंकि इसका अर्थव्यवस्था पर बहुत गहरा प्रभाव पड़ता है। यह बड़े पैमाने पर रोज़गार पैदा करता है, निवेश आकर्षित करता है और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है। एक आंकड़े के अनुसार, जहाज निर्माण में किया गया प्रत्येक निवेश, रोज़गार में 6.4 गुना की वृद्धि करता है और पूंजी का 1.8 गुना प्रतिफल देता है।

यह भी पढ़ें: हिंदुस्तान को हजार जख्म…परवेज मुशर्रफ के रास्ते पर चल रहे मुनीर, फिर होगा कारगिल जैसा यु्द्ध!

यह उद्योग दूरस्थ, तटीय और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार पैदा करने की अपार क्षमता रखता है। सिंधु घाटी सभ्यता और गुजरात के लोथल जैसे प्राचीन बंदरगाहों के प्रमाणों के साथ भारत का समुद्री क्षेत्र सदियों से वैश्विक व्यापार मार्गों से जुड़ा रहा है। कोरिया के साथ यह आधुनिक साझेदारी भारत के इस ऐतिहासिक गौरव को बहाल करने और इसे एक वैश्विक शिपिंग शक्ति बनाने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

India and south korea explore advanced shipbuilding partnership to meet rising energy shipping demand

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Published On: Nov 14, 2025 | 05:34 PM

Topics:  

  • Energy Sector
  • India
  • South Korea

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