आईएमएफ (सोर्स-सोशल मीडिया)
Middle East Economic Impact: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी भीषण युद्ध के कारण पूरी दुनिया में ऊर्जा का भारी संकट तेजी से पैदा हो गया है। इस गंभीर स्थिति और Middle East का आर्थिक प्रभाव से निपटने के लिए प्रमुख वैश्विक संगठनों ने हाथ मिलाया है। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विश्व बैंक के प्रमुखों ने वाशिंगटन में अहम बैठक की है। इस महत्वपूर्ण बैठक का मुख्य उद्देश्य वैश्विक अर्थव्यवस्था को युद्ध के भारी झटके से पूरी तरह बाहर निकालना है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, आईएमएफ और विश्व बैंक के प्रमुखों ने वाशिंगटन डीसी में एक बहुत ही अहम मुलाकात की है। अप्रैल की शुरुआत में गठित समन्वय समूह की नई रणनीति के तहत इस महत्वपूर्ण बैठक का विशेष आयोजन किया गया था। इस बैठक में मुख्य रूप से Middle East युद्ध के गंभीर आर्थिक और ऊर्जा प्रभावों पर विस्तार से अहम चर्चा की गई है।
इस युद्ध से विशेष रूप से कम आय वाले ऊर्जा आयातक देश दुनिया भर में सबसे ज्यादा और बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल, गैस और महत्वपूर्ण उर्वरकों की बढ़ती कीमतों ने खाद्य सुरक्षा की भारी चिंता बढ़ा दी है। इन चीजों के महंगे होने से कई देशों में नौकरियों के भारी नुकसान और भयंकर आर्थिक मंदी का खतरा पैदा हो गया है।
महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपिंग का सामान्य होना अभी भी बाकी है जिससे चिंता काफी ज्यादा है। इस अहम मार्ग के बाधित होने से पूरी दुनिया की ग्लोबल सप्लाई चेन बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित और बाधित हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रमुख वस्तुओं की आपूर्ति को पहले वाली स्थिति में लौटने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।
नेताओं ने कड़ी चेतावनी दी है कि होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग फिर से शुरू होने के बाद भी कई मुश्किलें ऐसे ही बनी रहेंगी। बुनियादी ढांचे को हुए भारी नुकसान के कारण ईंधन और उर्वरक की कीमतें लंबे वक्त तक काफी ज्यादा ऊंची रह सकती हैं। इसके कारण एनर्जी, फूड और अन्य कई प्रमुख उद्योगों के लिए जरूरी कच्चे माल की भारी कमी होने की भी बड़ी आशंका है।
इस भयानक जंग ने बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापित करने के साथ-साथ उनके जीवन को भी बहुत ज्यादा प्रभावित किया है। दुनिया भर में महत्वपूर्ण नौकरियों और यात्रा तथा पर्यटन क्षेत्र को भी इस युद्ध ने बहुत ही बुरी तरह से प्रभावित किया है। इन सभी अहम क्षेत्रों को इस भारी नुकसान से उबरने और पूरी तरह से ठीक होने में अभी काफी ज्यादा वक्त लगने वाला है।
14 अप्रैल को आईईए की मासिक तेल बाजार रिपोर्ट और आईएमएफ के वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक की रिपोर्ट जारी होने वाली हैं। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक इस गंभीर संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों को विशेष वित्तीय सहायता देने के लिए काम कर रहे हैं। ये संगठन संकटग्रस्त सदस्य देशों की भलाई के लिए बेहतरीन नीतिगत सलाह और जरूरी मदद देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
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तीनों बड़े संस्थानों ने एनर्जी मार्केट्स और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर जंग के प्रभाव की निगरानी जारी रखने का संकल्प लिया है। इनका मुख्य टार्गेट एक लचीली रिकवरी की मजबूत नींव रखना है, जो दुनिया को स्थिरता, विकास और कई नई नौकरियां प्रदान कर सके। इसके लिए सभी देशों की विशेषज्ञता और उनके संसाधनों का बहुत ही सही तरीके से उपयोग किया जा रहा है जिससे संकट दूर हो।