खामेनेई (Image- Social Media)
Israel Attack on Iran: मध्य पूर्व में जारी भारी तनाव के बीच ईरान से एक बड़ी खबर सामने आई है। ईरान पर इजरायल और अमेरिका के लगातार हमलों के दौरान ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है। इस घटना के बाद ईरान में जहां एक तरफ मातम पसरा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ हिस्सों में जश्न का माहौल भी देखा जा रहा है। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक विस्तृत विवरण साझा नहीं किया गया है, लेकिन विशेषज्ञ इसे मोसाद और सीआईए के वर्षों पुराने खुफिया समन्वय का परिणाम मान रहे हैं।
इजरायल की खुफिया एजेंसी मोसाद का विदेशों में टारगेटेड हत्याएं करने का एक पुराना इतिहास रहा है। गार्जियन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मोसाद के जासूस पिछले कई सालों से खामेनेई की हर हरकत पर नजर रख रहे थे। इजरायली जासूसों ने उनकी दैनिक दिनचर्या, उनके परिवार, करीबियों और उनकी सुरक्षा में तैनात अधिकारियों की एक विस्तृत फाइल तैयार कर रखी थी।
करीब 20 साल पहले मोसाद ने अपनी रणनीति में एक बड़ा बदलाव किया था। उन्होंने ईरान के भीतर ही स्थानीय लोगों को एजेंट के तौर पर भर्ती करना शुरू किया और उन्हें विशेष ट्रेनिंग दी। मोसाद के डायरेक्टर डेविड बार्निया ने ‘विदेशी टुकड़ी’ के लिए एक विशेष विभाग बनाया था, जिन्हें मिडिल ईस्ट में खास मिशनों के लिए तैनात किया गया था। ईरान में सत्ता विरोधी लोगों की मौजूदगी के कारण ऐसे एजेंटों की भर्ती करना मोसाद के लिए अपेक्षाकृत आसान रहा।
इस ऑपरेशन में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए (CIA) की भूमिका बेहद अहम रही। सीआईए लंबे समय से ईरानी नेतृत्व की गतिविधियों, उनके रहने के ठिकानों, उनके संचार के तरीकों और आपात स्थिति में उनके छिपने की जगहों का अध्ययन कर रही थी। रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल पहले इस हमले को रात के अंधेरे में अंजाम देना चाहता था, लेकिन सीआईए की एक सटीक जानकारी ने पूरे प्लान को बदल दिया।
सीआईए ने इजरायली समकक्षों को यह जानकारी दी कि शनिवार की सुबह तेहरान के एक नेतृत्व परिसर में ईरानी शीर्ष अधिकारियों की बैठक होने वाली है। सीआईए ने न केवल बैठक का समय बताया, बल्कि यह भी पुख्ता किया कि खामेनेई वहां मौजूद रहेंगे। इसी जानकारी के आधार पर इजरायल ने सुबह करीब 6 बजे अपने लड़ाकू विमानों से उस परिसर पर सटीक गोलाबारी की, जिसने इस साझा अभियान को सफल बनाया।
ईरान में मोसाद का नेटवर्क कितना मजबूत है, इसका अंदाजा पिछले कुछ वर्षों में हुए ऑपरेशनों से लगाया जा सकता है। मोसाद ने इससे पहले ईरान के टॉप परमाणु वैज्ञानिक की रिमोट-कंट्रोल्ड ऑटोमैटिक गन से हत्या की थी और परमाणु दस्तावेजों की चोरी जैसे साहसिक कारनामों को अंजाम दिया था। इतना ही नहीं, 2024 में हमास नेता इस्माइल हानियेह की तेहरान के एक सुरक्षित गेस्टहाउस में हत्या भी इसी नेटवर्क की ताकत का प्रमाण थी।
हाल ही में इजरायल और ईरान के बीच 12 दिनों तक चले भीषण युद्ध के दौरान भी इजरायल खामेनेई को निशाना बनाना चाहता था। इजरायल के रक्षा मंत्री इसरायल काट्ज़ ने भी पुष्टि की थी कि उनका देश ईरान के सर्वोच्च नेता को खत्म करने की योजना पर काम कर रहा था। पिछले साल से ही इजरायल और अमेरिका की खुफिया एजेंसियां मिलकर इस मौके की तलाश में थीं, जिसे आखिरकार इस सटीक हमले के जरिए अंजाम दिया गया।
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इस घटना ने पूरे मध्य पूर्व के समीकरण बदल दिए हैं। जहां इजरायल इसे अपनी बड़ी जीत के रूप में देख रहा है, वहीं ईरान के भीतर और बाहर इसके गंभीर परिणाम होने की आशंका जताई जा रही है। फिलहाल, दुनिया की नजरें अब ईरान के अगले कदम और इस क्षेत्र में होने वाले संभावित बदलावों पर टिकी हैं।