Saudi Arabia faces Houthi Missile Threat: अमेरिका और ईरान के युद्ध का प्रभाव खाड़ी देशों में भी देखने को मिल रहा है। इसी बीच सऊदी सिविल डिफेंस ने इस्लाम के सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मक्का, जेद्दा और अन्य इलाकों में मिसाइल खतरे की चेतावनी दी है। उन्होंने सुरक्षा के लिहाज से 5 शहरों क्रमशः तैफ़, यानबू, मक्का, तबुक और जेद्दा में चेतावनी जारी की है।
सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा का कहना है कि खतरा अब इन इलाकों से गुजर रहा है। संभावित खतरे के प्रति सचेत करने के लिए मक्का शहर में नेशनल अर्ली वॉर्निंग प्लेटफॉर्म की तरफ से जारी की गई है। इसमें निर्देशों के पालन करने की बात कही गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, सऊदी सिविल डिफेंस का यह अलर्ट आमतौर पर मिसाइल हमले के संभावित खतरे का संकेत देती है। एजेंसी ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा है कि मक्का शहर में संभावित खतरे के बारे में जानकारी दी गई है और जनता से नागरिक सुरक्षा निर्देशों का पालन करना जारी रखें और भीड़ इकट्ठा करने और वीडियो बनाने से बचने का निर्देश जारी किया गया है साथ ही आपात स्थिति में (911) पर कॉल करने को कहा गया है।
ऐसे में यह चेतावनी 10 दिनों से भी कम समय में दूसरी बार है, जब अधिकारियों ने मक्का के लिए ऐसी चेतावनी जारी की है। मक्का दुनियाभर के लिए इस्लाम का सबसे पवित्र स्थल है। सऊदी अरब के पश्चिमी तट के अन्य इलाकों के लिए भी अलग-अलग चेतावनियां जारी की गई हैं। इनमें लाल सागर के पास स्थित यानब के साथ-साथ ताइफ, जेद्दा और तबुक इलाके शामिल हैं। हालांकि अलर्ट को कुछ समय बाद हटा लिया गया लेकिन खतरा पूरी तरह से टला नहीं है।
सऊदी अरब, हूती विद्रोहियों के द्वारा मक्का को ड्रोन से निशाना बनाने की कोशिश के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सेना द्वारा ड्रोन का तबाह कर दिया गया। सऊदी अरब का कहना है कि 2017 के बाद से ऐसी कोशिश पहली बार हुई है। हूती गुट ने इन आरोपों से इनकार किया है।
इससे पहले 15 सितंबर को चेतावनी जारी की गई थी। जब सऊदी अरब की एयर डिफेंस सिस्टम ने मक्का के दक्षिण में एक हूती ड्रोन को नष्ट कर दिया गया था। वह ड्रोन प्रतिबंधित हवाई क्षेत्र में दाखिल नहीं हो सकता था। हूती विद्रोहियों ने पिछले कई सालों में पहली बार सबसे पहले सऊदी अरब की राजधानी रियाद को टारगेट किया था. इससे इस संघर्ष का तनाव और बढ़ गया।
यह यमन के अल्पसंख्यक शिया 'जैदी' समुदाय से जुड़े लड़ाके हैं। इस समूह की स्थापना 1990 के दशक में हुसैन बदरुद्दीन अल-हूती ने की थी। इन्होनें साल 2014 में यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर लिया और देश के बड़े हिस्से पर नियंत्रण बनाए रखा है।
इन्हें ईरान का गुप्त और सामरिक समर्थन प्राप्त है। यह समूह खुद को ईरान, हिजबुल्लाह और हमास के साथ अपना गठबंधन मानता है।
इनका मुख्य संघर्ष सऊदी अरब (जो यमन सरकार का समर्थन करता है), इसराइल और अमेरिका के साथ है। लाल सागर में अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर लगातार होते हमलों के कारण ये वैश्विक स्तर पर चर्चा में रहे हैं।