

Yemen Houthis Red Sea Attack: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इस कब्जे से प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग अल मंदेब स्ट्रेट पर हूतियों की पकड़ और अधिक मजबूत हो गई है।
हूतियों ने सऊदी अरब की 1,200 किलोमीटर लंबी मुख्य तेल पाइपलाइन पर ड्रोन व मिसाइल से भीषण हमला किया है। इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं।
यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी लाल सागर में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण कई द्वीपों पर कब्जा कर लिया है। इस घटनाक्रम से अल मंदेब स्ट्रेट में उनकी रणनीतिक पकड़ मजबूत होने की बात कही जा रही है। अल मंदेब एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जो स्वेज नहर के जरिए यूरोप और सऊदी अरब के पश्चिमी बंदरगाहों को हिंद महासागर तथा एशिया से जोड़ता है।
इसी वजह से इस जलमार्ग का वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति में अहम महत्व है। हूतियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय जहाजों को उनके अभियान से खतरा नहीं है। हालांकि, उन्होंने सऊदी अरब से जुड़े जहाजों के खिलाफ हमले जारी रखने की बात कही है। इससे लाल सागर में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है।
हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह से जोड़ने वाली मुख्य तेल पाइपलाइन को निशाना बनाया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पाइपलाइन पर ड्रोन और मिसाइल से हमला किया गया।
करीब 1200 किलोमीटर लंबी इस पाइपलाइन के जरिए हर दिन लगभग 5 मिलियन बैरल कच्चे तेल का परिवहन किया जाता है। इसकी सबसे बड़ी रणनीतिक खासियत यह है कि इसके जरिए सऊदी अरब होर्मुज स्ट्रेट को बायपास कर लाल सागर के रास्ते तेल भेज सकता है।
पाइपलाइन पर हमले के बाद सऊदी अरब ने यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई तेज कर दी है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यमन में 50 से अधिक हवाई हमले किए हैं।
क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दिया। कच्चे तेल की कीमतें जुलाई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं। ऐसे में लाल सागर और आसपास के समुद्री मार्गों पर किसी भी बड़े व्यवधान से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ती है।
हूती यमन के अल्पसंख्यक शिया जैदी समुदाय से जुड़ा एक शक्तिशाली हथियारबंद विद्रोही संगठन है। समूह का यमन के उत्तर-पश्चिमी हिस्से के बड़े क्षेत्र पर प्रभाव है। 1990 के दशक में हुसैन अल हूती ने तत्कालीन राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह के शासन और भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन शुरू किया था।
हुसैन अल हूती के नाम पर संगठन को हूती कहा गया। संगठन खुद को अंसार अल्लाह यानी ‘ईश्वर के साथी’ के नाम से भी संबोधित करता है। वर्ष 2003 में इराक पर अमेरिकी हमले के दौरान समूह ने अमेरिका और इजरायल के खिलाफ विरोध तेज किया था।
हूतियों को ईरान के नेतृत्व वाली ‘प्रतिरोध की धुरी’ का हिस्सा माना जाता है। उनका हमास और लेबनान के हिज्बुल्लाह के साथ भी संबंध बताया जाता है। माना जाता है कि हिज्बुल्लाह वर्ष 2014 से हूती लड़ाकों को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान कर रहा है।
वर्ष 2014 में हूतियों ने यमन की राजधानी सना पर कब्जा कर सरकार को बेदखल कर दिया। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने सैन्य हस्तक्षेप किया। तब से यमन का संघर्ष क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और समुद्री सुरक्षा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है।