ट्रंप फिर से फोड़ेंगे टैरिफ बम, कहा- US में निवेश न करने वाले चिप निर्माताओं पर लगेगा टैक्स
US Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि जो सेमीकंडक्टर कंपनियां अमेरिका में निवेश नहीं करेंगी, उन पर भारी टैरिफ लगाया जाएगा, जबकि निवेश करने वालों को इससे छूट मिलेगी।
- Written By: अक्षय साहू
सेमीकंडक्टर कंपनियों पर ट्रंप टैरिफ (फोटो- सोशल मीडिया)
Trump Tariffs News: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्दी ही दुनिया पर नया टैरिफ बम फोड़ने वाले है। इसके लेकर उन्होंने हाल ही में धमकी तक दी है। हालांकि इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति के निशाने पर कोई देश नहीं बल्कि सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली कंपनियांं है। ट्रंप ने इन कपंनियों को टैरिफ लगाने की धमकी दी है।
ट्रंप ने सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली कंपनियों को चेतावनी दी है कि, जो कंपनियां अमेरिका में इन्वेस्टमेंट नहीं करेंगी, वो उन पर भारी टैरिफ लगाएंगे। उन्होंने कहा कि वो जल्द ही इसकी घोषणा करेंगे। इसके अलावा ट्रंप ने यह ही कहा कि इसमें उन कंपनियों को शामिल नहीं किया जाएगा, जो अमेरिका में अपनी कंपनी खोल रही हैं या इसके बारे में सोच रही है।
अमेरिका में पैसा न लगाने वालों पर टैरिफ
डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस में हुई एक प्रेस काफ्रेंस में कहा कि, अब उनकी सरकार सेमीकंडक्टर चिप के आयात पर टैरिफ लगाने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा, टैरिफ सिर्फ उन कंपनियों के लिए होगा, जो अमेरिका में चिप प्लांट के लिए इन्वेस्टमेंट नहीं कर रही है। उन्होंने पिछले महीने भी कहा था कि अमेरिका सेमीकंडक्टर चिप के आयात पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा और सरकार ने इसके लिए कदम उठाने भी शुरू कर दिए हैं।
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राष्ट्रपति ट्रंप के ओर से लगातार मिल रही टैरिफ धमकियों के चलते मार्केट पहले ही उथल-पुथल है। पूरी दुनिया में व्यापार युद्ध को छेड़ दिया है। ट्रंप ने टैरिफ को किसी हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं। वो इसे अपने ‘अमेरिका फर्स्ट’ पॉलिसी का अहम हिस्सा मानते हैं। उनका मानना है कि वो इस तरह से अमेरिका पर टैरिफ लगाने वाले देशों पर दवाब बना सकते हैं, साथ ही सालों से चले आ रहे व्यापार घाटे को कम कर सकते हैं।
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कोर्ट में चल रहा है मामला
राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के खिलाफ संघीय अदालतों में अपील की गई है, और एक संघीय अदालत ने इन टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। ट्रंप पर यह आरोप है कि उन्होंने संविधान के तहत प्राप्त अपनी शक्तियों का दुरुपयोग किया है। इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
