हार्वर्ड पर ट्रंप की सख्ती: विदेशी छात्रों का दाखिला रोके जाने की दी चेतावनी, 30 दिन में मांगी सफाई
ट्रंप प्रशासन ने हार्वर्ड पर देशविरोध, यहूदी विरोध और चीन से साठगांठ के आरोप लगाए हैं। जवाब न देने पर विदेशी छात्रों के दाखिले को लेकर मान्यता खत्म हो सकती है। फिलहाल आरोपों के पुख्ता सबूत नहीं हैं।
- Written By: सौरभ शर्मा
विदेशी छात्रों के दाखिले को लेकर हार्वर्ड की मान्यता खत्म करने की चेतावनी (फोटो- सोशल मीडिया)
वाशिंगटन डीसी: अमेरिका की प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी को ट्रंप प्रशासन से बड़ा झटका लगा है। विदेशी छात्रों के दाखिले को लेकर हार्वर्ड की मान्यता खत्म करने की चेतावनी दी गई है और 30 दिन के भीतर जवाब देने को कहा गया है। आरोप है कि यूनिवर्सिटी ने राष्ट्रविरोधी गतिविधियों को बढ़ावा दिया, यहूदी विरोध को प्रश्रय दिया और चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से मिलीभगत की। हालांकि, अब तक इन आरोपों के कोई ठोस प्रमाण नहीं दिए गए हैं। यदि जवाब संतोषजनक नहीं हुआ तो हार्वर्ड के हजारों विदेशी छात्रों का भविष्य अधर में पड़ सकता है।
हार्वर्ड ने इस फैसले को संविधान और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है। विश्वविद्यालय का कहना है कि ऐसा कदम न केवल उनकी छवि को नुकसान पहुंचाएगा, बल्कि उन विदेशी छात्रों पर भी असर डालेगा जो शिक्षा और शोध के लिए वहां पहुंचे हैं। अदालत में यह मामला तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और आने वाले दिनों में यह उच्च शिक्षा की स्वतंत्रता बनाम राजनीतिक दबाव की बड़ी बहस का रूप ले सकता है।
DHS का नोटिस और 30 दिन की मोहलत
होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने हार्वर्ड को नोटिस भेजते हुए कहा है कि वह स्टूडेंट एक्सचेंज एंड विजिटर प्रोग्राम के तहत विदेशी छात्रों के प्रवेश की योग्यता खो सकती है। यह मामला 22 मई को शुरू हुआ जब प्रशासन ने यह घोषणा की थी। अदालत में जानकारी दी गई कि यूनिवर्सिटी को 30 दिन की कानूनी प्रक्रिया के तहत सफाई देने का अवसर मिलेगा।
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विदेशी छात्रों पर संकट, शिक्षण आजादी पर बहस
अगर यह निर्णय लागू होता है तो हार्वर्ड में पढ़ रहे लगभग 27 प्रतिशत विदेशी छात्रों को या तो अन्य संस्थानों में जाना होगा या उनका वीजा और कानूनी दर्जा रद्द हो सकता है। पूर्व राष्ट्रपति ट्रंप ने यहां तक कहा कि विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों की संख्या 15% से अधिक नहीं होनी चाहिए, जिसे शिक्षण आज़ादी पर सीधा हमला माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मुद्दा केवल दाखिले का नहीं, बल्कि शिक्षा की स्वायत्तता और प्रशासनिक हस्तक्षेप से जुड़ा है।
