कौन हैं हरमीत ढिल्लों? ट्रंप के चुनाव हारते ही दिया इस्तीफा, अमेरिकी राजनीति में हलचल तेज

Harmeet Dhillon Resigns: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के बाद ट्रंप प्रशासन को बड़ा झटका लगा है। नागरिक अधिकार प्रभाग की प्रमुख हरमीत ढिल्लों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया।
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हरमीत ढिल्लों(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Highlights:

  • मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद हरमीत ढिल्लों ट्रंप प्रशासन छोड़ने वाली पहली वरिष्ठ अधिकारी बनीं

  • ढिल्लों के कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग के 75 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ी या गंवाई

  • मतदाता सूची और विश्वविद्यालयों से जुड़े कई मामलों में न्याय विभाग को अदालतों से झटका लगा

Harmeet Dhillon Resignation: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव के नतीजों के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन में इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। अमेरिकी न्याय विभाग के नागरिक अधिकार प्रभाग की प्रमुख हरमीत ढिल्लों ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। चुनाव नतीजों के बाद ट्रंप प्रशासन छोड़ने वाली वह पहली वरिष्ठ अधिकारी हैं।

अमेरिका के अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर हरमीत ढिल्लों के काम की तारीफ की। उन्होंने कहा कि ढिल्लों ने पूरी मजबूती के साथ नागरिक अधिकार प्रभाग का नेतृत्व किया। उन्होंने अमेरिकी नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की और बिना किसी डर या भेदभाव के कानून लागू किया।

ढिल्लों ने एक्स पर पोस्ट करके दी जानकारी 

वहीं, ढिल्लों ने भी गुरुवार को एक्स पर अपने इस्तीफे को लेकर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि नागरिक अधिकारों के लिए सहायक अटॉर्नी जनरल (AAG) के रूप में देश की सेवा करना उनके जीवन का सबसे बड़ा सम्मान रहा।

उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में अवैध DEI (विविधता, समानता और समावेशन) नीतियों को खत्म करने के लिए काम किया गया। इसके अलावा महिलाओं और लड़कियों के खेलों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी कदम उठाए गए। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप को यह मौका देने के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि वह आगे मिलने वाले अवसरों को लेकर उत्साहित हैं।

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कौन है हरमीत ढिल्लों?

हरमीत ढिल्लों ने करीब डेढ़ साल तक सहायक अटॉर्नी जनरल के पद पर काम किया। इससे पहले वह ट्रंप के चुनाव प्रचार अभियान में कानूनी सलाहकार थीं। उनके कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग के काम करने के तरीके में बदलाव हुए। पहले इस विभाग का मुख्य काम लोगों को मतदान का अधिकार दिलाना और पुलिस सुधार से जुड़े कानूनों को लागू करना था।

लेकिन ढिल्लों ने ट्रंप प्रशासन की नीतियों के हिसाब से विभाग की प्राथमिकताएं बदलीं। उन्होंने उस विचारधारा का विरोध किया, जिसे वह 'वोक विचारधारा' कहती थीं। वह सोशल मीडिया पर भी काफी सक्रिय रहती थीं। नागरिक अधिकारों से जुड़े फैसलों के अलावा वह अपनी बुनाई की रुचि से जुड़ी पोस्ट भी साझा करती थीं।

ढिल्लों ने हथियार रखने के अधिकार जैसे दक्षिणपंथी मुद्दों का भी समर्थन किया। अमेरिकी संविधान के दूसरे संशोधन के तहत मिलने वाले इस अधिकार के लिए उन्होंने विभाग में एक अलग प्रभाग भी शुरू किया।

75 फीसदी से ज्यादा कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी

ढिल्लों के कार्यकाल में नागरिक अधिकार प्रभाग में कर्मचारियों की संख्या काफी कम हो गई। विभाग के 75 प्रतिशत से ज्यादा कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी या उन्हें हटा दिया गया। इसके बाद ढिल्लों ने कई रूढ़िवादी विचारधारा वाले वकीलों को नियुक्त किया। हालांकि, नए कर्मचारियों की संख्या और अनुभव पुराने कर्मचारियों की कमी पूरी नहीं कर सके।

चुनावी मामलों में भी सीमित हुई भूमिका

इस्तीफे से पहले के कुछ हफ्तों में ढिल्लों न्याय विभाग के कई बड़े चुनावी मामलों से दूर होती दिखाई दीं। विभाग ने ऐसे कई मुकदमे शुरू किए थे, जो ट्रंप के उन आरोपों से जुड़े थे, जिनमें उन्होंने डेमोक्रेटिक पार्टी पर चुनाव में धांधली करने का आरोप लगाया था। इन मामलों में ट्रंप की खास दिलचस्पी थी, लेकिन धीरे-धीरे इनमें ढिल्लों की भूमिका कम होती गई।

मतदाता सूची के मामलों में अदालतों से मिली हार

ढिल्लों को मतदाता सूचियों से जुड़े मामलों में बड़ा झटका लगा। उन्होंने कई राज्यों में मुकदमे दायर कर मतदाता सूची में शामिल गैर-अमेरिकी नागरिकों के नाम हटाने की मांग की थी। हालांकि, देशभर की अदालतों ने इन मुकदमों को खारिज कर दिया। न्यायाधीशों ने आशंका जताई कि इन प्रयासों से लोगों के मतदान के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं या उनकी निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है।

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ढिल्लों ने कुछ विश्वविद्यालयों के खिलाफ भी कार्रवाई की थी। इन संस्थानों पर यहूदी विरोध और मुख्य रूप से श्वेत छात्रों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगाए गए थे। हालांकि, इन मामलों में न्याय विभाग को अदालतों से ज्यादा सफलता नहीं मिली। कुछ विश्वविद्यालयों ने यहूदी विरोध रोकने के लिए कदम उठाने पर सहमति जताई।