अमेरिका ने Hormuz से खींचा हाथ! अडानी की हो गई चांदी, जानें क्या है IMEC प्रोजेक्ट जिससे भारत को होगा फायदा

US-Iran War: होर्मुज संकट के बीच खाड़ी देशों ने निकाला नया रास्ता; इजरायल के हाइफा पोर्ट के जरिए यूरोप तक तेल भेजने की तैयारी। अडाणी समूह के इस बंदरगाह की भूमिका हुई बेहद अहम।
Hormuz Crisis Gulf IMEC Project
इजरायल के हाइफा से तेल निर्यात पर विचार कर रहे खाड़ी देश (सोर्स- सोशल मीडिया)
Updated on

Hormuz Crisis Gulf IMEC Project: मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच खाड़ी देश अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपनी निर्भरता कम करने के लिए नए विकल्प तलाश रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अरब देश इजरायल के हाइफा स्थित बंदरगाह के जरिए कच्चे तेल के निर्यात पर विचार कर रहे हैं, जिससे इस अहम समुद्री मार्ग पर निर्भरता घटाई जा सके।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने हाल ही में खाड़ी देशों के सामने यह प्रस्ताव रखा था कि तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जाएं, ताकि क्षेत्रीय संकट का असर ऊर्जा आपूर्ति पर कम हो।

अडाणी समूह की अहम भूमिका

इस योजना में शामिल हाइफा पोर्ट का संचालन भारतीय अडानी समूह के पास है। यह बंदरगाह एक कंसोर्टियम के माध्यम से खरीदा गया था, जिसमें अडाणी समूह की 70% हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 30% हिस्सेदारी इजरायल की स्थानीय कंपनी गैडोट के पास है। इस समूह को वर्ष 2054 तक संचालन का अधिकार मिला हुआ है। हाइफा पोर्ट इजरायल का दूसरा सबसे बड़ा बंदरगाह है और देश के लगभग आधे कंटेनर कार्गो को संभालता है। यह क्रूज जहाजों के लिए भी एक प्रमुख टर्मिनल के रूप में जाना जाता है।

हाइफा के जरिए यूरोप तक पहुंच

रिपोर्ट के अनुसार, जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें एक ऐसा कॉरिडोर भी शामिल है जो अरब प्रायद्वीप को भूमध्य सागर से जोड़ेगा। इससे तेल सीधे हाइफा पोर्ट के माध्यम से यूरोप तक पहुंचाया जा सकेगा। फिलहाल सऊदी ही ऐसा देश है जिसने ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ के जरिए रेड सी के यानबू पोर्ट तक तेल पहुंचाकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाईपास करने का सफल मॉडल तैयार किया है। विशेषज्ञ इसे एक रणनीतिक “मास्टरस्ट्रोक” मानते हैं।

मल्टी-मोडल नेटवर्क की योजना

नई योजनाओं में सिर्फ पाइपलाइन ही नहीं, बल्कि रेल और सड़क नेटवर्क को भी शामिल किया जा रहा है, ताकि तेल आपूर्ति के लिए बहु-विकल्पीय व्यवस्था बनाई जा सके। इससे क्षेत्रीय तनाव के बावजूद सप्लाई बाधित होने का खतरा कम होगा।

IMEC प्रोजेक्ट को मिल रहा बढ़ावा

इस रणनीति के केंद्र में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) है, जो भारत को मिडिल ईस्ट के रास्ते यूरोप से जोड़ने की महत्वाकांक्षी योजना है। इस प्रोजेक्ट के तहत पाइपलाइन, रेल और सड़क नेटवर्क के जरिए ऊर्जा और व्यापार को नई दिशा देने की तैयारी है। हालांकि, इस योजना की सफलता काफी हद तक सऊदी अरब की सहमति पर निर्भर करेगी, खासकर हाइफा पोर्ट को इस कॉरिडोर में शामिल करने के मुद्दे पर।

IMEC के पक्ष में नेतन्याहू

बेंजामिन नेतन्याहू का मानना है कि होर्मुज संकट का स्थायी समाधान ऊर्जा पाइपलाइनों को पश्चिम की ओर मोड़ना है, ताकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे रणनीतिक अवरोधों को पूरी तरह दरकिनार किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि सैन्य समाधान केवल अस्थायी राहत दे सकते हैं, जबकि दीर्घकालिक स्थिरता के लिए वैकल्पिक ऊर्जा मार्ग विकसित करना जरूरी है।

Navbharat Live
navbharatlive.com