ईरानी हमले से दुनिया भर में गैस सप्लाई संकट (सोर्स- सोशल मीडिया)
Gas Price Hike in US-Iran War: मिडिल ईस्ट में भड़की जंग की आंच अब पूरी दुनिया तक पहुंच चुकी है। इजराइल और अमेरिका द्वारा ईरान पर हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़े हैं और इसके आर्थिक असर ने वैश्विक बाजारों को हिला दिया है। जवाबी कार्रवाई में ईरान ने आठ खाड़ी देशों को निशाना बनाया, जिससे ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा संकट मंडराने लगा है।
इस तनाव का सबसे बड़ा असर ऊर्जा क्षेत्र पर पड़ा है। कतर की सरकारी कंपनी कतर एनर्जी ने घोषणा की है कि उसने लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) का उत्पादन अस्थायी रूप से रोक दिया है। ईरानी ड्रोन हमलों में कतर के दो प्रमुख औद्योगिक केंद्र रास लफ्फान इंडस्ट्रियल सिटी और मेसाईद इंडस्ट्रियल सिटी को निशाना बनाया गया। इन हमलों के कारण उत्पादन और निर्यात गतिविधियों को रोकना पड़ा।
कतर के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, एक ड्रोन ने रास लफ्फान स्थित एक ऊर्जा सुविधा पर हमला किया, जबकि दूसरे ड्रोन ने मेसाईद के एक पावर प्लांट में पानी के टैंक को निशाना बनाया। हालांकि किसी के हताहत होने की खबर नहीं है, लेकिन उत्पादन रुकने से वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मच गई है।
यूरोप के प्रमुख गैस मूल्य संकेतक डच TTF नेचुरल गैस बेंचमार्क में लगभग 45 प्रतिशत की तेज उछाल दर्ज की गई और कीमतें 54 डॉलर प्रति यूनिट से ऊपर पहुंच गईं। कतर दुनिया के प्रमुख LNG निर्यातकों में शामिल है, और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा रूस के साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी अहम भूमिका है। ऐसे में आपूर्ति में आई रुकावट से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गैस संकट की आशंका बढ़ गई है।
स्थिति को और गंभीर बना रहा है होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा, जहां से गुजरने वाली शिपिंग गतिविधियां ईरानी चेतावनियों के बीच पूरी तरह ठप हैं। यह मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम है।
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इस संकट का असर भारत पर भी पड़ सकता है। भारत और कतर के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध हैं, खासकर ऊर्जा क्षेत्र में। भारत अपनी कुल LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा कतर से आयात करता है। वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 25.6 मिलियन टन LNG आयात किया, जिसमें से करीब 10.9 मिलियन टन कतर से आया जो कुल आयात का लगभग 40 से 42 प्रतिशत है। ऐसे में यदि कतर का उत्पादन लंबे समय तक प्रभावित रहता है, तो इसका सीधा असर भारत की ऊर्जा कीमतों और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।