गाजा युद्ध पर यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर का बड़ा बयान, संयुक्त राष्ट्र खो चुका है अपनी विश्वसनीयता

Gaza War Vision: यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम ने गाजा युद्ध, UN की निष्पक्षता, हमास, ईरान के परमाणु कार्यक्रम व भारत-इजरायल के रणनीतिक संबंधों पर अपनी बेबाक राय व्यक्त की है।
Gaza War Global Diplomacy Analysis
यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम(सोर्स- IANS)
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Gaza War Global Diplomacy Analysis: गाजा युद्ध पर कूटनीतिक दबाव लगातार बढ़ रहा है। यरुशलम की पूर्व डिप्टी मेयर फ्लूर हसन नहौम ने इस पर स्पष्ट राय दी। उन्होंने इजरायल के खिलाफ माहौल और UN की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। इसके साथ ही गाजा, हमास, ईरान व भारत की भूमिका पर विचार रखे।

संयुक्त राष्ट्र और UNRWA की गिरती विश्वसनीयता

फ्लूर हसन नहौम ने कहा कि यूएन विश्वसनीयता खो चुका है। गाजा युद्ध में इजरायल पर कूटनीतिक दबाव चरम पर है। यूएन ने भुखमरी के झूठे दावे किए, जिन्हें इजरायल खारिज करता है। अन्य प्राणघातक संघर्षों की अनदेखी कर केवल इजरायल को घेरा गया।

नहौम ने UN एजेंसी UNRWA पर गंभीर आरोप लगाए। 2023 के नरसंहार में इसके कर्मियों की संलिप्तता के आरोप थे। आतंकियों को काम पर रखने से संस्था की तटस्थता खत्म हो गई। इसी वजह से वैश्विक मंच पर UN की साख पर सवाल उठे हैं।

गाजा के पुनर्निर्माण के लिए हमास को हटाना जरूरी

गाजा की चुनौतियों पर नहौम ने बहुस्तरीय कदम आवश्यक बताए। पहली शर्त हमास के कट्टरपंथी नेतृत्व को सत्ता से हटाना है। हमास लड़ाकों को हथियार छोड़ने होंगे ताकि हिंसा रुक सके। कट्टरपंथी वर्चस्व खत्म किए बिना गाजा में शांति असंभव है।

उन्होंने गाजा की प्रशासनिक व्यवस्था की तुलना माफिया राज से की। हमास आम लोगों का राशन चुराकर लड़ाकों को वेतन देता है। इस भ्रष्ट आपराधिक तंत्र को समाप्त करना बेहद जरूरी है। इसके बिना गाजा के नागरिकों का पुनर्निर्माण संभव नहीं है।

ईरान-अमेरिका संबंध और इजरायल की सुरक्षा

अमेरिका और ईरान वार्ताओं पर नहौम ने कहा कि समझौता दूर है। पूर्व के शांति प्रयास भी जमीनी स्तर पर विफल सिद्ध हुए हैं। ट्रंप को समझ आ चुका है कि तबाही फैलाने वालों से समझौता कठिन है। अगर कोई अस्थायी समझौता होता भी है, तो वह ज्यादा नहीं टिकेगा।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर उन्होंने इजरायल का रुख दोहराया। इजरायल चाहता है कि ईरान की संवर्धित परमाणु सामग्री नष्ट हो। भविष्य के परमाणु संवर्धन को हमेशा के लिए बंद किया जाना चाहिए। तभी मध्य पूर्व को भविष्य के परमाणु खतरों से सुरक्षित रखा जा सकता है।

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भारत और इजरायल के बढ़ते कूटनीतिक संबंध

द्विपक्षीय संबंधों पर नहौम ने भारत को मजबूत साझेदार व मित्र बताया। भारत बड़ा व्यापारिक सहयोगी है और शांति में बड़ी भूमिका निभा सकता है। भावी विश्व व्यवस्था तय करने में भारत को अग्रणी रहना चाहिए। दोनों देश व्यापार, तकनीक और सुरक्षा में सहयोग बढ़ा रहे हैं।

दोनों देश IMEC कॉरिडोर प्रोजेक्ट पर मिलकर काम कर रहे हैं। यह कॉरिडोर भारत, मध्य पूर्व, इजरायल व यूरोप को जोड़ेगा। I2U2 समूह के जरिए भारत, इजरायल, अमेरिका व UAE साथ हैं। ये आर्थिक समझौते पूरे क्षेत्र और विश्व को प्रगति की राह दिखाएंगे।

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