जंग से जूझ रहा गाजा अब बाढ़ की चपेट में; हर तरफ चीख-पुकार और बेबसी, हालात भयावह
Gaza Flood: इजरायल और हमास के बीच संघर्ष भले ही थमा हो लेकिन गाजा में रहने वाले लाखों विस्थापित लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। भारी बारिश, ठंड और अपर्याप्त राहत के चलते टेंट कैंपों में हालात...
- Written By: अमन उपाध्याय
गाजा में बाढ़, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Gaza Rain Disaster: गाजा पट्टी में युद्धविराम के बाद भी आम लोगों की जिंदगी सामान्य नहीं हो सकी है। इजरायली हमलों के रुकने से जहां लोगों को राहत की उम्मीद थी, वहीं अब मौसम उनके लिए सबसे बड़ी आफत बन गया है। भारी बारिश और लगातार गिरते तापमान ने गाजा के टेंट कैंपों को तबाही के कगार पर ला दिया है। हजारों विस्थापित परिवार पानी से भरे टेंटों में रहने को मजबूर हैं, जबकि राहत और मदद पहुंचाने का काम भी लगभग ठप पड़ गया है।
लगातार बारिश के चलते कई कैंपों में पानी घुटनों तक भर गया है। टेंटों के अंदर रखा खाना, कपड़े और जरूरी सामान पूरी तरह भीग चुका है। बच्चों को गंदे, भूरे पानी में चलने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। कच्ची सड़कें कीचड़ में तब्दील हो गई हैं और जगह-जगह कचरा व सीवेज बहता नजर आ रहा है, जिससे संक्रमण और बीमारियों का खतरा बढ़ गया है।
लोगों का सोना भी मुश्किल
खान यूनिस के टेंट कैंप में रहने वालों ने हालात बयां करते हुए कहा कि हम डूब गए हैं। हमारे पास पहनने के लिए सूखे कपड़े तक नहीं बचे हैं। टेंट में इतना पानी भर गया है कि सोना भी मुश्किल हो गया है। उनके मुताबिक, उनका परिवार कई रातों से ठीक से सो नहीं पाया है।
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राहत संगठनों का कहना है कि युद्धविराम के बावजूद गाजा में पर्याप्त मानवीय सहायता नहीं पहुंच पा रही है। फिलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र एजेंसी UNRWA ने चेतावनी दी है कि ठंडा, भीड़भाड़ वाला और अस्वच्छ वातावरण बीमारियों को तेजी से फैला सकता है। एजेंसी ने कहा कि अगर बिना रुकावट राहत सामग्री पहुंचाई जाए तो इस मानवीय त्रासदी को रोका जा सकता है।
विस्थापित लोग सबसे ज्यादा परेशान
मुवासी इलाके के टेंट कैंप में रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि उनके परिवार की सुबह टेंट की छत से टपकते पानी और सड़क से बहते पानी के बीच हुई। उन्होंने कहा कि मेरी छोटी बेटियां डर के मारे चिल्ला रही थीं। कैंप में ऐसा कोई टेंट नहीं बचा जो बाढ़ से सुरक्षित रहा हो। उनके मुताबिक, यहां बुजुर्ग, बीमार और विस्थापित लोग सबसे ज्यादा परेशान हैं।
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वहीं, एक महीला ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उनका आठ साल का बेटा पूरी रात भीगता रहा और सुबह तक उसका शरीर ठंड से नीला पड़ गया। दूसरी ओर, तीन महीने के जुड़वां बच्चों की मां बारका ने कहा कि उनके पुराने टेंट से लगातार पानी टपक रहा है और वह इस सर्दी में अपने बच्चों की जान को लेकर डरी हुई हैं।
