GTI Report On Terrorism: आतंकवाद को पालने वाले देश पाकिस्तान के लिए ही अब आतंकवाद गले की फांस बन गया है, जिसे चाह के भी अब निगल नहीं सकता है। आतंकवाद को लेकर प्रकाशित हुई वैश्विक आतंकवाद सूचकांक के अनुसार दुनियाभर में पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे ज्यादा प्रभावित देश है। पाकिस्तान आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित देश के रूप में सूचकांक में सबसे ऊपर है, जहां 2025 में 1,139 मौतें और 1,045 घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2013 के बाद से इसका उच्चतम स्तर है।
अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी ने इन आंकड़ों पर पाकिस्तान की पुरानी नीतियों को लेकर तख्ल टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान अब उन चरमपंथी समूहों की वजह से पैदा हुई हिंसा का सामना कर रहा है, जिन्हें अतीत में समर्थन दिया गया था।
जीटीआई आतंकवाद को लेकर व्यापक अध्ययन करता है जो विश्व की 99.7 प्रतिशत आबादी को कवर करने वाले 163 देशों पर आतंकवाद के प्रभाव रिपार्ट पेश किया है।
हुसैन हक्कानी ने X पर पोस्ट करके अपनी भड़ास निकाली है। उन्होंने लिखा है कि घर के पिछवाड़े में सांप पालने का यही नतीजा होता है। एक दिन घर के सदस्य भी सांप का शिकार हो जाते हैं। पाकिस्तान ने पचास साल पहले चरमपंथी जिहादियों को हथियार देना शुरू किया था। अब आतंकवादी हमलों का सबसे अधिक निशाना बनने वाले देशों में पाकिस्तान सबसे ऊपर है। क्या कोई सबक सीखने को तैयार है?
वैश्विक स्तर पर आतंकवाद से होने वाली मौतों में 28 प्रतिशत की गिरावट आई और यह संख्या घटकर 5,582 हो गई, जबकि आतंकी घटनाओं में 22 प्रतिशत की कमी आई और यह संख्या 2,944 रह गई, जो 2007 के बाद से सबसे कम है।
इसके विपरीत, पश्चिमी देशों में आतंकवाद से होने वाली मौतों में 280 प्रतिशत की भारी वृद्धि हुई और 2025 में यह संख्या 57 रह गई, जिसका मुख्य कारण यहूदी-विरोधी भावना, और इस्लामोफोबिया राजनीतिक आतंकवाद है।
आतंकवाद को लेकर आई जीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार आतंकवाद से सबसे अधिक प्रभावित दस देशों में से छह उप-सहारा अफ्रीका में हैं, जो आतंकवाद के केंद्र के रूप में अपनी स्थिति बनाए हुए है।
2021 के बाद से युवा आतंकवाद में तीन गुना वृद्धि हुई है। इसी अवधि में, 93 प्रतिशत पश्चिमी देशों में हुए सभी घातक हमले अकेले हमलावरों द्वारा किए गए थे।
इस्लामिक स्टेट (आईएस) और उसके सहयोगी संगठन 2026 में भी सबसे घातक आतंकवादी संगठन बने रहे, जो विश्व स्तर पर हुए कुल हमलों में से लगभग 17 प्रतिशत के लिए जिम्मेदार थे।
सीमावर्ती क्षेत्रों में आतंकवाद पिछले 15 वर्षों में दोगुने से भी अधिक हो गया है। 2025 में 76 प्रतिशत से अधिक हमले अंतरराष्ट्रीय सीमा से 100 किलोमीटर के भीतर हुए, जबकि 2007 में यह आंकड़ा लगभग 60 प्रतिशत था।