Ebola Outbreak: कांगो-युगांडा में इबोला का तांडव, 220 से ज्यादा मौतें; WHO ने घोषित की हेल्थ इमरजेंसी

Ebola Outbreak News: अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला का दुर्लभ 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन' तेजी से फैल रहा है। 900 से अधिक संदिग्ध मामलों के बीच भारत समेत दुनिया भर में अलर्ट जारी किया गया है।
Ebola Outbreak: Ebola Wreaks Havoc in Congo and Uganda; Over 220 Deaths; WHO Declares Health Emergency
सांकेतिक तस्वीर (सो. AI)
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Ebola Outbreak WHO Health Emergency: अफ्रीका के कांगो और युगांडा में इबोला वायरस का प्रकोप बेहद डरावनी रफ्तार से बढ़ रहा है। WHO के ताजा आंकड़ों के अनुसार, अब तक इबोला के 900 से ज्यादा संदिग्ध मामले सामने आ चुके हैं और कम से कम 223 लोगों की मौत की आशंका जताई गई है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए WHO ने इसे 'इंटरनेशनल हेल्थ इमरजेंसी' घोषित कर दिया है।

जानलेवा है 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन

विशेषज्ञों के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय इबोला का वह स्ट्रेन है जो इस बार तबाही मचा रहा है। इस बार 'बुंडीबुग्यो स्ट्रेन' फैल रहा है, जो इबोला का एक अलग प्रकार है। इसकी भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके लिए फिलहाल कोई खास वैक्सीन या सटीक इलाज उपलब्ध नहीं है। WHO के मुताबिक, इस स्ट्रेन में मृत्यु दर 30% से 50% तक हो सकती है। यह स्ट्रेन पहली बार साल 2007 में युगांडा में देखा गया था।

अस्पताल से भाग गए मरीज

कांगो में इबोला के खिलाफ जंग केवल वायरस से नहीं, बल्कि वहां जारी सशस्त्र संघर्ष से भी है। रिपोर्ट के मुताबिक, इटुरी प्रांत में विद्रोहियों ने अस्पतालों पर हमले किए हैं। जिससे स्थिति नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है। मोंगबवालु जनरल रेफरल अस्पताल पर हुए हमले के बाद 18 इबोला मरीज अस्पताल से भाग गए। जिनमें से कम से कम एक मरीज संक्रमण की पुष्टि होने के बाद भी भीड़ के बीच घूम रहा है। पूर्वी कांगो में जारी हिंसा की वजह से स्वास्थ्य टीमें प्रभावित इलाकों तक नहीं पहुंच पा रही हैं।

भारत में हाई अलर्ट

भारत सरकार ने भी इस खतरे को देखते हुए तत्काल कदम उठाए हैं। केंद्र सरकार ने  कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान की यात्रा से बचने की सख्त सलाह जारी की है। देश के प्रमुख हवाई अड्डों पर थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई है और संदिग्ध यात्रियों को आइसोलेट करने के निर्देश दिए गए हैं। विशेष रूप से केरल सरकार ने प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए 21 दिन का क्वारंटाइन अनिवार्य कर दिया है। हालांकि, हाल ही में बेंगलुरु लौटी एक महिला की रिपोर्ट निगेटिव आने से थोड़ी राहत जरूर मिली है।

वैश्विक पाबंदियां और सावधानी

इबोला के बढ़ते खतरे को देखते हुए केवल भारत ही नहीं, बल्कि अमेरिका और कनाडा जैसे देशों ने भी सख्त यात्रा प्रतिबंध लागू कर दिए हैं,। कनाडा ने प्रभावित देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेशन प्रक्रिया 90 दिनों के लिए रोक दी है। वहीं, यूरोपीय संघ (EU) ने अफ्रीका में वायरस ट्रैकिंग के लिए करीब 22 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की है।

विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि इबोला संक्रमित व्यक्ति के पसीने, खून और शारीरिक तरल पदार्थों से फैलता है, इसलिए अत्यधिक सावधानी और स्वच्छता ही इससे बचाव का एकमात्र रास्ता है।

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