खतरे में जिंदगी! डर के साए में जी रहा तालिबान का सुप्रीम लीडर, हर रोज बदल रहा अपना घर

Afghanistan News: अमेरिका की डर के कारण तालिबान के सर्वोच्च नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा लगातार अपने ठिकाने बदल रहे हैं और उन्होंने अपनी साप्ताहिक बैठकें भी रद्द कर दी हैं।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तालिबान पर लगातार बना रहे दबाव, (डिजाइन फोटो )
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Donald Trump Pressure on Taliban: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार तालिबान पर दबाव बना रहे हैं और उन्हें आतंकवाद के मुद्दे पर चेतावनी दे रहे हैं। इसी बीच, तालिबान के सुप्रीम नेता मुल्ला हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा मौत के डर से लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। अफगानिस्तान इंटरनेशनल के सूत्रों के अनुसार, उन्होंने न केवल ठिकाना बदलना शुरू कर दिया है, बल्कि इस हफ्ते अपनी नियमित साप्ताहिक बैठक भी उलेमा परिषद के साथ रद्द कर दी है।

तालिबान के सुप्रीम लीडर मुल्ला हिबतुल्लाह लगातार अपना ठिकाना बदल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, वे पहले मंदिगक, ऐनो मीना, अब्दुल रज़ीक अचकज़ई के घर और कंधार आर्मी कोर के पुराने मुख्यालय में रहते थे। लेकिन पिछले तीन दिनों से उनका सही ठिकाना पता नहीं चल पाया है और कोई भी यह ट्रैक नहीं कर सका कि वे इस समय कहां हैं।

तालिबान नेता बार-बार बदल रहे अपने ठिकाने

मिली जानकारी के अनुसार, तालिबान नेता हाल ही में अपने ठिकानों में बार-बार बदलाव कर रहे हैं। अफगानिस्तान इंटरनेशनल को दिए गए सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पहले मुल्ला हिबतुल्लाह का निवास पता ज्ञात होता था और वे हर हफ्ते उलेमा परिषद से मिलते थे, लेकिन इस हफ्ते उन्होंने यह बैठक रद्द कर दी है।

बगराम एयरबेस को लेकर मची है हलचल

डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान को लेकर फिर से चेतावनी दी है। 17 सितंबर को ब्रिटेन के दौरे के दौरान उन्होंने अफगानिस्तान के बगराम एयरबेस पर अमेरिकी नियंत्रण की बात उठाई और कहा कि यह बेस चीन के परमाणु हथियार निर्माण स्थल से सिर्फ एक घंटे की दूरी पर है, इसलिए इसे दोबारा लेना जरूरी है।

तालिबान के लिए गंभीर होंगे नतीजे

इसके बाद 20 सितंबर को ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर चेतावनी दी कि अगर अमेरिका को बगराम बेस का नियंत्रण वापस नहीं मिला, तो तालिबान के लिए गंभीर नतीजे होंगे। उसी दिन व्हाइट हाउस में उन्होंने कहा कि अगर तालिबान ने ऐसा नहीं किया, तो वे कार्रवाई करेंगे। इन धमकियों के बाद तालिबान ने बयान जारी किया जिसमें कहा गया कि दोहा समझौते के अनुसार अमेरिका ने अफगानिस्तान की भौगोलिक अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के खिलाफ ताकत या धमकी का इस्तेमाल नहीं करने का वादा किया था।

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