Donald Trump की ईरान को चेतावनी: 100% समझौते तक जारी रहेगा सैन्य दबाव, लाएंगे ‘न्यूक्लियर डस्ट’
Iran Nuclear Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति Trump ने साफ किया है कि जब तक ईरान के साथ पूर्ण और अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक सैन्य दबाव जारी रहेगा और वे 'न्यूक्लियर डस्ट' को भी अमेरिका वापस लाएंगे।
- Written By: प्रिया सिंह
न्यूक्लियर डस्ट समझौता ईरान (सोर्स- सोशल मीडिया)
US Military Pressure On Iran: पश्चिम एशिया में भारी तनाव के बीच अमेरिका ने ईरान को लेकर अपनी कड़ी रणनीति साफ कर दी है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान पर सैन्य दबाव तब तक नहीं हटेगा जब तक समझौता पूरा नहीं होता। यह ईरान पर अमेरिकी सैन्य दबाव तब तक जारी रहेगा जब तक दोनों देशों में सौ फीसदी अंतिम सहमति नहीं बनती। इसके साथ ही ट्रंप ने ईरान से रेडियोधर्मी मलबे यानी ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को भी वापस लाने की बड़ी योजना बताई है।
कड़ा सैन्य दबाव
डोनाल्ड ट्रंप ने एरिजोना में टर्निंग पॉइंट यूएसए के एक कार्यक्रम में ईरान के मुद्दे पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका किसी भी प्रकार के आंशिक या अंतरिम समझौते से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं होगा। उनका कहना है कि जब तक सौ फीसदी अंतिम समझौता नहीं होता, तब तक सैन्य दबाव पूरी तरह बना रहेगा।
नेवल ब्लॉकेड रहेगा जारी
Trump के अनुसार इस सैन्य दबाव में क्षेत्र में अमेरिकी नेवल ब्लॉकेड और भारी सैन्य मौजूदगी लगातार शामिल रहेगी। अमेरिका की यह मैक्सिमम प्रेशर वाली रणनीति ईरान को परमाणु कार्यक्रम पर पीछे हटने के लिए मजबूर करने वाली है। सुरक्षा मुद्दों पर व्यापक समझौते के लिए यह दबाव दोनों देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत का अहम हिस्सा है।
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होर्मुज स्ट्रेट हुआ सुरक्षित
Trump ने यह भी दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य अब पूरी तरह खुल गया है और व्यापार के लिए सुरक्षित है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा कॉरिडोर है जहां से बहुत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल गुजरता है। इसके बावजूद उन्होंने साफ कहा कि इस क्षेत्र में अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और दबाव में कोई कमी नहीं आएगी।
क्या है न्यूक्लियर डस्ट
Trump ने अपने बयान में ईरान से ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को वापस अमेरिका लाने की एक बहुत बड़ी योजना का जिक्र किया। न्यूक्लियर डस्ट ईरान में हुए अमेरिकी हमलों या परमाणु गतिविधियों से जुड़ा हुआ रेडियोधर्मी मलबा और अहम अवशेष है। विशेषज्ञों के अनुसार आम तौर पर इसका मतलब परमाणु विस्फोट के बाद बचने वाले खतरनाक रेडियोधर्मी कणों से होता है।
जोखिम भरा है काम
इस खतरनाक रेडियोधर्मी मलबे को वहां से निकालना और सुरक्षित तरीके से स्थानांतरित करना बेहद जटिल और जोखिम भरा है। इसके लिए उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय निगरानी और बहुत ही सख्त वैज्ञानिक प्रोटोकॉल का पालन करना सबसे ज्यादा जरूरी होता है। Trump ने इसके लिए एक संयुक्त खुदाई ऑपरेशन का अहम सुझाव दिया है जो दोनों देशों की आपसी सहमति से होगा।
ईरान की सहमति जरूरी
हालांकि इस तरह के किसी भी बड़े कदम के लिए ईरान की पूरी सहमति और वैश्विक संस्थाओं की भूमिका बहुत अहम होगी। बिना अंतरराष्ट्रीय सहयोग के इतने खतरनाक रेडियोधर्मी मलबे को एक देश से दूसरे देश ले जाना लगभग नामुमकिन माना जाता है। यह देखना बहुत ज्यादा जरूरी होगा कि ईरान इस संयुक्त खुदाई ऑपरेशन के लिए अपनी मंजूरी दुनिया के सामने देता है या नहीं।
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लेबनान सीजफायर का जिक्र
Trump ने यह भी दावा किया कि अमेरिका के लगातार प्रयासों से पश्चिम एशिया में तनाव अब कुछ हद तक कम हुआ है। उन्होंने कहा कि इस्राइल और लेबनान के बीच चौदह दिन का एक ऐसा सीजफायर हुआ है जो पहले कभी नहीं हुआ। ट्रंप के मुताबिक ऐसा सकारात्मक डेवलपमेंट पिछले अठहत्तर वर्षों के लंबे इतिहास में पहली बार पूरी दुनिया ने देखा है।
