ट्रम्प और मैक्रों, फोटो (सो. सोशल मीडिया)
Donald Trump France Airspace Denial: पश्चिम एशिया में जारी ईरान और इजरायल के बीच भीषण संघर्ष ने अब दुनिया के सबसे शक्तिशाली सैन्य संगठन नाटो के भीतर एक बड़ी कूटनीतिक दरार पैदा कर दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने प्रमुख यूरोपीय सहयोगी फ्रांस पर तीखा हमला बोला है। ट्रंप की यह नाराजगी तब सामने आई जब फ्रांस ने इजरायल जा रहे अमेरिकी सैन्य विमानों को अपने हवाई क्षेत्र का उपयोग करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।
डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट के जरिए अपनी भड़ास निकाली। उन्होंने फ्रांस के इस कदम को विश्वासघात जैसा बताते हुए लिखा कि फ्रांस ने उन अमेरिकी विमानों को रास्ता नहीं दिया जो सैन्य सामग्री के साथ इजरायल जा रहे थे। ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई को ‘बूचर ऑफ ईरान’ करार दिया और कहा कि फ्रांस ने उन्हें खत्म करने के मामले में कोई मदद नहीं की। ट्रंप ने बेहद सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा, ‘अमेरिका यह याद रखेगा’।
केवल अमेरिका ही नहीं बल्कि इजरायल ने भी फ्रांस के इस रुख पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ने फ्रांस को अपने रक्षा उपकरणों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। इजरायली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने इस आदेश को फ्रांस की “इजरायल विरोधी नीति” का नतीजा बताया है। इजरायली अधिकारियों का मानना है कि पिछले दो वर्षों से फ्रांस का रवैया उनके प्रति शत्रुतापूर्ण रहा है और अमेरिकी विमानों को रास्ता न देना ‘ऊंट की कमर पर आखिरी तिनका’ साबित हुआ है।
अमेरिका के लिए झटका केवल फ्रांस तक सीमित नहीं रहा। इटली ने भी अमेरिका को सैन्य सहयोग देने से हाथ पीछे खींच लिए हैं। इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेट्टो ने सिगोनेला सैन्य बेस का इस्तेमाल अमेरिकी विमानों के लिए करने की इजाजत नहीं दी। इटली की जांच में पाया गया कि ये उड़ानें सामान्य लॉजिस्टिकल उड़ानें नहीं थीं इसलिए द्विपक्षीय संधि के तहत उन्हें अनुमति नहीं दी जा सकती थी। प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा, ‘हम युद्ध में नहीं हैं और युद्ध नहीं चाहते’।
इसी तरह, स्पेन के प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज ने भी ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की हत्या की निंदा की और साफ किया कि उनकी सरकार सिद्धांतों के आधार पर युद्ध के खिलाफ है। हालांकि ट्रंप ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि स्पेन ने अमेरिकी सैन्य अड्डों का उपयोग करने नहीं दिया, तो उसके साथ व्यापारिक संबंध काट दिए जाएंगे लेकिन स्पेन अपने फैसले पर अडिग है।
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फ्रांस, इटली और स्पेन जैसे प्रमुख नाटो सहयोगियों के इस इनकार ने अमेरिका के पश्चिम एशिया अभियान को संकट में डाल दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यूरोप के भीतर बढ़ता यह विरोध दर्शाता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और इजरायल को सैन्य समर्थन जुटाने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल ईरान युद्ध के भविष्य को प्रभावित करेगी बल्कि नाटो के भविष्य के स्वरूप पर भी सवाल खड़े कर रही है।