‘मुझे कोई दिलचस्पी नहीं…’ ईरान जंग के बीच नोबेल शांति पुरस्कार पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा बयान
Middle East War: ईरान में जारी 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार में अपनी दिलचस्पी न होने की बात कही है, जो उनके पिछले बयानों से बिल्कुल अलग है।
- Written By: प्रिया सिंह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (सोर्स-सोशल मीडिया)
Operation Epic Fury In Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अक्सर अपने बयानों से दुनिया को चौंका देते हैं। इन दिनों जब ईरान के खिलाफ ईरान में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी जोरों पर है, ट्रंप ने एक बार फिर सबको हैरत में डाल दिया है। कभी खुद को नोबेल शांति पुरस्कार का सबसे बड़ा हकदार बताने वाले ट्रंप अब इससे दूरी बना रहे हैं। वॉशिंगटन एग्जामिनर को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपनी हताशा या शायद नई रणनीति को साफ जाहिर किया है।
हताशा या बदली हुई रणनीति?
गुरुवार को एक इंटरव्यू के दौरान जब ट्रंप से उनके नोबेल जीतने की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से इसे नजरअंदाज कर दिया। ट्रंप ने सीधे शब्दों में कहा कि उन्हें अब इस पुरस्कार में रत्ती भर भी दिलचस्पी नहीं बची है। यह वही ट्रंप हैं जो पहले अक्सर खुद को शांति का मसीहा बताते हुए इस सम्मान का हकदार कहते थे।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का साया
वर्तमान में अमेरिकी सेना ईरान में ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ चला रही है, जिसे ट्रंप वहां के लोगों की आजादी का मिशन बताते हैं। इस ऑपरेशन के दौरान ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई, जिन्हें ट्रंप ने आतंकी शासन का प्रतीक माना था। युद्ध के इन हालातों के बीच शांति पुरस्कार की चर्चा करना शायद ट्रंप को अब रास नहीं आ रहा है।
सम्बंधित ख़बरें
US Airstrikes: जॉर्डन बेस पर हमले के बाद भड़के ट्रंप, ईरान पर अमेरिका ने फिर से शुरू की एयरस्ट्राइक
एक व्यक्ति भी जीवित बचा तब भी… पाक सेना की गोलीबारी के बीच JAAC का बड़ा ऐलान, 48 घंटे में 31 की मौत
PoK चुनाव में जीत के बाद मरियम का बिलावल पर तंज, बोलीं- रोने-धोने से नहीं बदलेगा जनादेश; हार स्वीकार करे PPP
Antarctica Ice Melt से समुद्र का जलस्तर बढ़ने का भारी खतरा, तबाही से बचने का समय है बहुत कम
वर्ल्ड लीडर्स से बातचीत और नोबेल
जब उनसे पूछा गया कि क्या अन्य देशों के नेताओं से बातचीत में इस पुरस्कार का जिक्र होता है, तो उन्होंने इनकार कर दिया। ट्रंप का कहना है कि वह फोन कॉल्स पर नोबेल प्राइज के बारे में बात नहीं करते और उनका ध्यान सिर्फ काम पर है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि बार-बार नजरअंदाज किए जाने से उनके मन में कहीं न कहीं गहरी निराशा है।
पुरस्कार की चाहत का पुराना सफर
इसी साल जनवरी में ट्रंप ने बड़े गर्व से कहा था कि दुनिया में उनसे ज्यादा कोई और नोबेल शांति पुरस्कार का हकदार नहीं है। उनका मानना था कि उनके फैसलों से दुनिया भर में कई बड़ी लड़ाइयां रुकने में मदद मिली और जानें बचाई गईं। लेकिन अब बदली हुई परिस्थितियों ने शायद उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि उन्हें कभी यह अवॉर्ड नहीं मिलेगा।
यह भी पढ़ें: ईरान के स्कूल पर अमेरिकी मिसाइल हमला… सैकड़ों मासूमों की मौत, क्या ट्रंप बनेंगे युद्ध अपराधी?
वेनेजुएला का ऑफर और पाबंदी
पिछले साल जब वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारा कोरिना मचाडो को यह शांति पुरस्कार मिला, तो उन्होंने इसे ट्रंप को देने की पेशकश की थी। ट्रंप के लिए यह एक बड़ा मौका हो सकता था, लेकिन नोबेल कमेटी ने नियमों का हवाला देते हुए इसे नामुमकिन बताया। कमेटी के अनुसार शांति पुरस्कार को किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर करने का कोई प्रावधान नहीं है।
