ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा (सोर्स- सोशल मीडिया)
US-Iran Conflict: खाड़ी देशों में छिड़े युद्ध को आज सात दिन पूरे हो गए हैं। बीते एक हफ्ते में ईरान ने भारी तबाही झेली है, लेकिन तनाव कम होने के बजाय और गहराता जा रहा है। हालात इतने नाजुक हैं कि अजरबैजान पर ईरानी ड्रोन हमलों के आरोपों और होर्मुज स्ट्रेट में ठप पड़ी आवाजाही ने दुनिया भर की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं। इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है।
गुरुवार को डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़ा दावा करते हुए कहा कि खामेनेई के बाद ईरान का अगला नेता चुनने में उनकी सीधी भूमिका होगी। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में खलबली मचा दी है। उधर, रायसीना डायलॉग के दौरान ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादा ने ट्रंप पर करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा, “जो व्यक्ति न्यूयॉर्क का मेयर नियुक्त नहीं कर सकता, वह ईरान का भविष्य तय करने की कोशिश कर रहा है।” खतीबजादा ने स्पष्ट किया कि ईरान अमेरिका की ‘फुटबॉल’ मानसिकता के बजाय ‘शतरंज’ की तरह कूटनीति खेल रहा है और यह युद्ध उनके लिए ‘अस्तित्व की जंग’ है।
इस युद्ध के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि उनकी अगली प्राथमिकताएं बदल सकती हैं। उन्होंने साफ किया कि ईरान के बाद अमेरिका का रुख क्यूबा की ओर मुड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि यह अमेरिकी विदेश नीति में एक बड़े बदलाव का संकेत है। हालांकि, अभी ट्रंप का पूरा ध्यान इस संघर्ष को अपने पक्ष में खत्म करने पर है। गैस कीमतों में 7% की बढ़ोतरी और अमेरिकी पेट्रोलियम रिजर्व के सवाल पर ट्रंप ने बेपरवाही दिखाते हुए कहा कि उन्हें गैसोलीन की कीमतों से अधिक युद्ध का परिणाम महत्वपूर्ण लगता है।
इस सैन्य संघर्ष में सबसे बड़ी कीमत आम जनता और बच्चों को चुकानी पड़ रही है। यूनिसेफ की ताजा रिपोर्ट दिल दहलाने वाली है। 28 फरवरी को मिनाब के एक गर्ल्स एलिमेंट्री स्कूल पर हुए हमले सहित अब तक करीब 180 बच्चों की मौत हो चुकी है। एजेंसी ने बताया कि कम से कम 20 स्कूल और 10 अस्पताल युद्ध में क्षतिग्रस्त हुए हैं। यूनिसेफ ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि युद्ध के दौरान भी स्कूलों और अस्पतालों को ‘सेफ जोन’ माना जाए, क्योंकि मासूमों की मौत युद्ध की सबसे क्रूर सच्चाई है।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे इस युद्ध का असर अब यूरोप तक पहुंच गया है। रूस ने चेतावनी दी है कि यदि यह संघर्ष जल्द समाप्त नहीं हुआ, तो यूरोप को गैस सप्लाई रोक दी जाएगी। ऐसे में पूरी दुनिया इस वक्त एक बड़े वैश्विक संकट के मुहाने पर खड़ी है, जहां कूटनीति की जगह अब केवल सैन्य धमकियां ले रही हैं। भारत भी स्थिति पर बारीकी से नजर बनाए हुए है और विदेश सचिव ने ईरानी राजदूत से मुलाकात कर स्थिति का जायजा लिया है।