चुटकुले सुनाती तो गोली मार देते…कॉमेडियन ने इस मुस्लिम नेता को बताया तानाशाह, खोले कई काले राज
Comedian Rejected Riyadh Comedy Festival: सऊदी अरब में हो रहे दुनिया के सबसे बड़े कॉमेडी फेस्टिवल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है, कई कॉमेडियन ने मानवाधिकार हनन का हवाला देकर इसमें हिस्सा नहीं ले रहे है।
- Written By: अक्षय साहू
कॉमेडियन मिशेल वुल्फ, प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (सोर्स- सोशल मीडिया)
Saudi Arabia: सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) कई सालों से अपनी और देश की कट्टर इस्लामिक छवि को बदलने में लगे है। सलमान ने इसके के लिए ऐसे कई फैसले लिए हैं जिनके बारे में उससे पहले कोई सोच भी नहीं सकता था। इसी कड़ी में उन्होंने राजधानी रियाद में 26 सितंबर से 9 अक्टूबर तक एक बड़े कॉमेडी फेस्टिवल का आयोजन किया जा रहा है,लेकिन अब फेस्टिवल विवादों से घिर गया है
रियाद में आयोजित इस कार्यक्रम को दुनिया का सबसे बड़ा कॉमेडी शो बता रहे हैं। लेकिन कई कॉमेडियन इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर चुके हैं, क्योंकि उनका कहना है कि सऊदी अरब का मानवाधिकार रिकॉर्ड बहुत खराब है। एक महिला कॉमेडियन मिशेल वुल्फ ने तो कहा कि अगर वो सऊदी में अपने बोल्ड जोक्स सुनातीं, तो सरकार शायद उन्हें मारे डालती।
चुटकुले सुनाती तो मुझे मरवा देते
मिशेल वुल्फ ने रियाद कॉमेडी फेस्टिवल न्यौता ठुकरा दिया। इसे लेकर उन्होंने मजाक में कहा कि, “अगर मैं सऊदी में अपने बोल्ड चुटकुले सुनाती तो शायद सरकार मुझे मरवा देती।”
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वहीं, एक और कॉमेडियन अत्सुको ओकात्सुका ने फेस्टिवल का न्यौता ठुकरा दिया और सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करके बताया कि परफॉर्म करने वालों को सऊदी क्राउन प्रिंस, शाही परिवार और इस्लाम पर कोई मजाक करने की इजाजत नहीं है। ओकात्सुका के अलावा भी बहुत से कॉमेडियन इस फेस्टिवल को पाखंड करार दिया है, उनका कहना है कि जहां बोलने की आजादी नहीं, वहां कॉमेडी की बात करना ही गलत है।
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फेस्टिवल की टाइमिंग भी चर्चा
इसके अलावा फेस्टिवल की टाइमिंग को लेकर भी काफी चर्चा है, क्योंकि 2 अक्टूबर को पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या को 7 साल पूरे हो रहे हैं। खाशोज्जी की 2018 में तुर्की के इस्तांबुल स्थित सऊदी दूतावास में हत्या कर दी गई थी। एक अमेरिकी रिपोर्ट के मुताबिक, इस हत्या की मंजूरी खुद क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान (MBS) ने दी थी, हालांकि सऊदी सरकार ने इससे इनकार किया है। माना जा रहा है कि सऊदी सरकार इस फेस्टिवल का इस्तेमाल अपनी छवि सुधारने के लिए कर रही है, ताकि दुनिया उसके कड़े कानून और अभिव्यक्ति की आजादी पर पाबंदी को नजरअंदाज कर दे।
