काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और शिक्षकों के बीच टकराव, कई लोग हुए घायल
Nepal Teachers Protest: काठमांडू में रविवार को शिक्षा में सुधार और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन के दौरान दो समूहों के बीच हिंसक झड़प में कम से कम सात शिक्षक और कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए।
- Written By: अमन उपाध्याय
काठमांडू में प्रदर्शन के दौरान पुलिस और शिक्षकों के बीच टकराव, फोटो ( सो. सोशल मीडिया)
नवभारत इंटरनेशनल डेस्क: नेपाल की राजधानी काठमांडू में रविवार को शिक्षा सुधार और वेतन वृद्धि की मांग को लेकर एक बड़ा प्रदर्शन हुआ, जिसमें दो समूहों के बीच हिंसक झड़प हो गई। इस झड़प में कम से कम सात शिक्षक समेत कुछ पुलिसकर्मी घायल हो गए। वहां पर मौजूद एक लोगों के अनुसार, टकराव उस समय शुरू हुआ जब शिक्षक बिजुलीबाजार से न्यू बानेश्वर तक की सड़क पर एकत्रित हुए और वे उस क्षेत्र में जाने की कोशिश करने लगे, जहां जाने की अनुमति नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए उन्हें रोका जब वो नहीं रूके तो पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, शिक्षक सुरक्षा घेरा तोड़ने का प्रयास कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने आंदोलनकारी शिक्षकों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज किया और साथ ही पानी की बौछार भी की। प्रत्यक्षदर्शी ने यह भी बताया कि इस झड़प में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।
लगभग एक महीने से आंदोलन कर रहे शिक्षक
नेपाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए हजारों स्कूल शिक्षक स्कूली शिक्षा में सुधार और वेतन-भत्तों में वृद्धि की मांग को लेकर काठमांडू में लगभग एक महीने से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग संसद द्वारा स्कूल शिक्षा विधेयक को मंजूरी देना है। पिछले सप्ताह, शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री विद्या भट्टराई को आंदोलनकारी शिक्षकों की मांगों का समाधान न कर पाने के कारण इस्तीफा देना पड़ा, और उनकी जगह रघुजी पंत को नया मंत्री नियुक्त किया गया। हालांकि, इसके बाद भी शिक्षकों की समस्या का समाधान नहीं निकल सका है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने कहा शिक्षक कक्षाओं में लौटें
नेपाल के सर्वोच्च न्यायालय ने एक अस्थायी आदेश जारी करते हुए सरकार से प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों की उचित मांगों को प्राथमिकता देने और यह सुनिश्चित करने को कहा है कि शिक्षक कक्षाओं में लौट आएं। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आदेश में यह कहा गया कि देशभर में चल रहे शिक्षक विरोध प्रदर्शन से छात्रों के शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन हो रहा है और यदि अदालत हस्तक्षेप नहीं करती, तो यह स्थिति जारी रह सकती है।
