HMPV (कांसेप्ट फोटो सौ. सोशल मीडिया)
नवभारत डेस्क : भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद ने ह्यूमन मेटा न्यूमो वायरस पर किए गए रिसर्च को साझा करते हुए एक बड़ी राहत दी है। शोध परिणाम के मुताबिक, इस वायरस के खतरे से घबराने की जरूरत नहीं है। आंकड़े कहते हैं कि अगले माह में फरवरी के बाद इसका असर धीरे-धीरे और कम होने लगेगा है। हलांकि चीन से फैले मानव मेटान्यूमोवायरस के संक्रमण ने दुनिया के कई देशों में दस्तक दे दी है। इसके साथ ही भारत में भी इस संक्रमण के कई मामले सामने आ रहे हैं। चीन ने बड़ा दावा किया है और चीन के एक स्वास्थ्य अधिकारी ने कहा है कि उत्तरी चीन में फ्लू जैसे कई HMPV के संक्रमण की दर घट रही है।
और संभावित महामारी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर में चिंता है, और मानव मेटान्यूमोवायरस का संक्रमण भी रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस के समान ही है। इसके HMPV संक्रमण में आने से बुखार, खांसी और नाक बंद होने समेत फ्लू या सर्दी जैसे कई लक्षण पैदा करता है, और इसका प्रभाव बच्चों पर देखने को मिलता है। इसके साथ ही ये संक्रमण बच्चों और बुजुर्गों को ज्यादा प्रभावित भी करता है।
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बता दें कि इस वायरस का पता पहली बार 2001 में नीदरलैंड में चला, और वांग ने इस पर कहा कि बेहतर परीक्षण विधियों के कारण हाल के सालो में इस वायरस के संक्रमण का पता लगाने की दर में वृद्धि हुई है।
जिससे उन्होंने वर्तमान में, ह्यूमन मेटान्यूमोवायरस के संक्रमण की पहचान की दर में उतार-चढ़ाव हो रहा है, और उत्तरी प्रांतों में संक्रमण का दावा है कि मामलों की दर में कमी आ रही है, और 14 वर्ष और उससे कम आयु के रोगियों में संक्रमण के मामलों की दर में गिरावट शुरू हो गई है। चीन में वर्तमान में लोगों को प्रभावित करने वाली श्वसन संबंधी बीमारियां ज्ञात रोगाणुओं के कारण होती हैं और कोई नई संक्रामक बीमारी सामने नहीं आई है।