चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग (सोर्स-सोशल मीडिया)
China Xi Jinping civil society crackdown: चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में नागरिक समाज और मानवाधिकारों के लिए जगह तेजी से खत्म होती जा रही है। हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अब किसी भी तरह की असहमति या स्वायत्तता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं दिख रही है। श्रमिक कार्यकर्ताओं से लेकर वकीलों और छात्रों तक, हर उस आवाज को दबाया जा रहा है जो व्यवस्था पर सवाल उठाती है। यह दमन अब एक व्यवस्थित पैटर्न बन चुका है, जिसने देश के भीतर भय और खामोशी का माहौल पैदा कर दिया है।
हेनान प्रांत में श्रमिक अधिकार कार्यकर्ता शिंग वांगली को तीन साल की सजा मिलना चीन की बढ़ती असहिष्णुता का ताजा उदाहरण है। उन पर “झगड़ा भड़काने और उपद्रव करने” जैसे अस्पष्ट आरोप लगाकर जेल भेज दिया गया है, जो वहां अक्सर कार्यकर्ताओं को फंसाने के लिए इस्तेमाल होते हैं। शिंग पहले ही विभिन्न मामलों में दस साल से अधिक समय जेल में बिता चुके हैं, जो दर्शाता है कि उन्हें बार-बार निशाना बनाया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों ने चीन की गिरती न्यायिक प्रक्रिया पर गंभीर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि वहां बंदियों को वकीलों से मिलने तक की अनुमति नहीं दी जा रही है। शिंग वांगली के मामले में भी उनके परिवार ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान उन्हें कानूनी सहायता और परिजनों से संपर्क करने से रोका गया। यह स्थिति दर्शाती है कि चीन में निष्पक्ष सुनवाई की संभावनाएं अब लगभग पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं और कानून का इस्तेमाल केवल दमन के लिए हो रहा है।
चीन में अब केवल सड़कों पर ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन दुनिया में भी निगरानी का एक अभेद्य जाल बिछा दिया गया है जो हर टिप्पणी पर नजर रखता है। ऑनलाइन टिप्पणीकारों और धार्मिक अनुयायियों को भी “अपारदर्शी” कानूनी सजाओं के जरिए डराया जा रहा है, जिससे सार्वजनिक विमर्श पूरी तरह खत्म हो गया है। सरकार की तकनीक-आधारित निगरानी प्रणाली अब समाज के हर वर्ग को अपनी मर्जी के अनुसार ढालने और जबरन अनुरूपता लाने का एक हथियार बन गई है।
श्रमिकों के अलावा छात्रों और वकीलों को भी चीन के दमनकारी अभियान का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि वे अक्सर सामाजिक न्याय की मांग उठाते हैं। मानवाधिकार वकीलों को अक्सर उनके लाइसेंस रद्द करने या उन्हें मनमानी हिरासत में लेने की धमकियां देकर चुप कराया जा रहा है। छात्र प्रदर्शनकारियों को भी राज्य विरोधी गतिविधियों के नाम पर कड़ी सजाएं दी जा रही हैं, जिससे भविष्य की बौद्धिक और क्रांतिकारी आवाजें पूरी तरह कुचली जा रही हैं।
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म्यांमार के मीडिया आउटलेट ‘मिज़्ज़िमा न्यूज़’ की रिपोर्ट ने इस बात पर जोर दिया है कि चीन में नागरिक स्वतंत्रताएं कई दशकों के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई हैं। अंतरराष्ट्रीय संगठनों की बार-बार की चेतावनियों के बावजूद बीजिंग अपनी नीतियों में कोई बदलाव नहीं कर रहा है और वैश्विक दबाव को अनसुना कर रहा है। यह व्यवस्थित दमन न केवल चीन के आंतरिक लोकतंत्र के लिए खतरा है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है।