अब गाना भी गुनाह, चीन में उइगर संगीत सुनने और डाउनलोड करने पर जेल, ड्रैगन का सख्त फरमान

China Uighur Song Ban: चीन के शिनजियांग प्रांत में उइगर संस्कृति पर दमन और तेज हो गया है। अब लोकगीत सुनने, डाउनलोड करने या साझा करने पर जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
Now even singing is a crime: In China, listening to and downloading Uyghur music can land you in jail, according to a strict decree from Beijing.
चीन में उइगर संगीत सुनने और डाउनलोड करने पर जेल, फोटो (सो. एआई डिजाइन)
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China News In Hindi: चीन ने शिनजियांग में उइगर मुसलमानों की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान पर एक बार फिर सख्ती बढ़ा दी है। स्थानीय प्रशासन ने उइगर भाषा के कई पारंपरिक लोकगीतों और समकालीन गानों को 'संदेहास्पद' करार देते हुए प्रतिबंधित कर दिया है। अब इन गीतों को मोबाइल फोन में रखना या सोशल मीडिया पर साझा करना गंभीर अपराध माना जाएगा जिसके लिए कड़ी जेल सजा का प्रावधान किया गया है।

इन प्रतिबंधित गीतों में उइगर समुदाय का प्रसिद्ध लोकगीत 'बेश पेड़े' भी शामिल है, जो वर्षों से शादियों और पारिवारिक समारोहों का अहम हिस्सा रहा है। यह गीत एक युवक की भावनाओं को व्यक्त करता है, जिसमें वह ईश्वर से प्रेम और सुखमय जीवन की प्रार्थना करता है।

शेयर करने पर भी कार्रवाई होगी

विशेषज्ञों का कहना है कि इस गीत में न तो हिंसा का कोई संकेत है और न ही किसी तरह की कट्टरता, इसके बावजूद इसे प्रतिबंध सूची में डाल दिया गया है। अक्टूबर में काशगर में हुई पुलिस बैठक के बाद साफ कर दिया गया कि ऐसे गीतों को शेयर करने पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

इस्लामी अभिवादन पर भी रोक

विश्लेषकों के मुताबिक, चीन की यह नीति सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं है, बल्कि उइगरों की पूरी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को कमजोर करने की दिशा में एक संगठित प्रयास है। प्रशासन ने पारंपरिक इस्लामी अभिवादन 'अस्सलामू अलैकुम' के उपयोग पर भी रोक लगा दी है। इसके स्थान पर लोगों को ऐसे नारे या वाक्य बोलने के लिए कहा जा रहा है, जिनमें कम्युनिस्ट पार्टी के प्रति निष्ठा दिखाई दे। इसे धार्मिक आस्थाओं को दबाकर साम्यवादी विचारधारा थोपने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। इसी क्रम में एक उइगर संगीत निर्माता को केवल गीत रचने और उन्हें साझा करने के आरोप में तीन साल की जेल की सजा सुनाई गई है।

बिना मुकदमे के हिरासत में

चीन की इन कार्रवाइयों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता जताई जा रही है। मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि 2017 से 2019 के बीच करीब दस लाख उइगर और अन्य अल्पसंख्यकों को बिना मुकदमे के हिरासत शिविरों में रखा गया।

संयुक्त राष्ट्र ने भी 2022 में जारी अपनी रिपोर्ट में कहा था कि शिनजियांग में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघन मानवता के खिलाफ अपराध की श्रेणी में आ सकते हैं। हालांकि, चीन लगातार इन आरोपों को नकारता रहा है और उसका कहना है कि ये कदम आतंकवाद और धार्मिक उग्रवाद पर नियंत्रण के लिए उठाए गए हैं जिनसे क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनी हुई है।

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