कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Strengthening India Canada Trade Relations: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी आज से अपनी पहली आधिकारिक भारत यात्रा पर आ रहे हैं जिससे दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के सुधरने की बड़ी उम्मीद जगी है। यह दौरा न केवल व्यापारिक और निवेश के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है बल्कि वैश्विक राजनीति में भारत की बढ़ती धमक को भी दर्शाता है। पिछले कुछ समय में यूरोपीय संघ, ब्राजील और फ्रांस के साथ हुए समझौतों के बाद अब कनाडा के साथ भी एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है। 27 फरवरी से 2 मार्च तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान ऊर्जा, तकनीक और आर्थिक भागीदारी के कई महत्वपूर्ण फैसलों पर मुहर लग सकती है।
मुंबई पहुंचने के बाद मार्क कार्नी अगले दो दिनों तक भारतीय उद्योगपतियों और वित्तीय विशेषज्ञों के साथ अहम बैठकें करेंगे ताकि निवेश के नए रास्ते खुल सकें। इस दौरान भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते यानी सीईपीए पर रुकी हुई बातचीत फिर से शुरू होने की प्रबल संभावना है।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के अनुसार इस समझौते का मुख्य उद्देश्य वर्तमान के करीब 30 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार को साल 2030 तक 50 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। यह डील न केवल शुल्क कम करेगी बल्कि सर्विस सेक्टर और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी सहयोग के नए द्वार खोलेगी जिससे दोनों देशों को लाभ होगा।
प्रधानमंत्री कार्नी और मोदी के बीच होने वाली उच्चस्तरीय वार्ता में यूरेनियम, कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों से जुड़े महत्वपूर्ण समझौतों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए कनाडा एक अहम साझेदार बन सकता है क्योंकि वह संसाधनों से समृद्ध देश है और भारत को इसकी सख्त जरूरत है।
इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और शिक्षा जैसे आधुनिक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनने की उम्मीद है जो युवाओं के लिए अवसर लाएगा। दोनों देशों के बीच निवेश बढ़ाने के लिए कनाडा के पेंशन फंड प्रमुखों के साथ होने वाली मुलाकात भारतीय इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।
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पिछले कुछ समय से जारी तनाव को कम करने की दिशा में यह यात्रा एक ‘रीसेट’ बटन की तरह काम करेगी जिससे द्विपक्षीय संबंधों में फिर से गर्माहट आने की उम्मीद है। कनाडा के लिए भारत एक बड़ा बाजार है खासकर तब जब उसे अमेरिकी टैरिफ नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।
2 मार्च को दिल्ली के हैदराबाद हाउस में होने वाली मुख्य वार्ता में क्रिटिकल मिनरल्स और रक्षा सहयोग जैसे गंभीर मुद्दों पर भी गहराई से चर्चा की जाएगी। यह दौरा न केवल व्यापारिक लाभ देगा बल्कि उत्तरी अमेरिका के साथ भारत की कूटनीतिक नीतियों को एक नई दिशा और मजबूती प्रदान करने में सहायक होगा।