Air India Bombing: कनाडा ने माना 1985 के विमान धमाके में था खालिस्तानियों का हाथ

Air India Bombing: कनाडा ने 40 साल बाद माना कि 1985 के विमान धमाके में खालिस्तानी आतंकी शामिल थे। इस भयानक घटना में 329 निर्दोष लोगों की मौत हुई थी, जिनमें ज्यादातर कनाडाई नागरिक शामिल थे।
Air India: Canada Admits Khalistani Extremists Role In Tragic 1985 Flight Bombing
बम धमाके के बाद एयर इंडिया का विमान (सोर्स-सोशल मीडिया)
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1985 Air India Bombing: साल 1985 में टोरंटो से मुंबई जा रहे एयर इंडिया के विमान में एक भयानक बम धमाका हुआ था। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की जान चली गई थी। यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला था। अब करीब 40 साल बाद कनाडा ने आधिकारिक तौर पर एक बहुत बड़ा बयान देते हुए सच्चाई को स्वीकार कर लिया है।

कनाडाई खुफिया एजेंसी (CSIS) ने माना है कि इस धमाके के पीछे खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। भारत हमेशा से ही इस बात को दोहराता रहा है कि यह साजिश कनाडा से रची गई थी। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस दुखद घटना को देश का सबसे भयानक आतंकवादी हमला बताया है। यह स्वीकारोक्ति भारत और कनाडा के कूटनीतिक रिश्तों के लिए अहम मोड़ है।

धमाके की खौफनाक साजिश

यह यात्री विमान टोरंटो से मुंबई के लिए उड़ान भर रहा था। इस बोइंग 747 विमान को सम्राट कनिष्क के नाम से भी जाना जाता था। हीथ्रो हवाई अड्डे पर उतरने से ठीक 45 मिनट पहले हवा में ही इसमें बम फट गया। इस दर्दनाक धमाके में 329 मासूम लोगों की जान चली गई। इस साजिश को प्रतिबंधित खालिस्तानी संगठन बब्बर खालसा ने अंजाम दिया था। संगठन के एक शातिर सदस्य ने विमान के लगेज कंपार्टमेंट में बम छिपा दिया था। हालांकि वह खुद इस विमान में सवार नहीं हुआ था और बाहर ही रह गया था। इसके कारण निर्दोष यात्रियों को अपनी जान गंवानी पड़ी और उनके परिवार उजड़ गए।

कनाडा ने अपनी बड़ी गलती मानी

भारत शुरू से ही कहता रहा है कि यह हमला कनाडा में मौजूद खालिस्तानियों ने किया था। अब कैनेडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस (CSIS) ने भी इस सच्चाई को मान लिया है। उन्होंने अपनी फेसबुक पोस्ट के जरिए इस घटना को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अहम मोड़ बताया है। यह कनाडा के इतिहास का सबसे घातक आतंकवादी हमला माना गया है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इसे देश के इतिहास का सबसे बड़ा और घातक आतंकवादी हमला करार दिया। साल 2005 में कनाडा सरकार ने 23 जून को आतंकवाद के पीड़ितों की याद में राष्ट्रीय स्मृति दिवस घोषित किया था। अब जाकर सच्चाई को पूरी तरह और आधिकारिक रूप से स्वीकारा गया है। इससे पीड़ित परिवारों को थोड़ी शांति जरूर मिलेगी।

ऑपरेशन ब्लूस्टार और जांच में भारी देरी

इस खौफनाक हमले को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के ऑपरेशन ब्लूस्टार के जवाब में की गई कार्रवाई माना जाता है। इस बड़े सैन्य ऑपरेशन का मकसद अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से हथियारबंद अलगाववादियों को हटाना था। इसी ऑपरेशन के बाद चरमपंथियों ने यह पूरी खौफनाक साजिश रची थी। यह भारत और कनाडा दोनों के लिए एक दर्दनाक समय था।

साल 2010 में पूर्व जस्टिस जॉन मेजर की एक पब्लिक जांच में पता चला कि एजेंसियों से कई गलतियां हुई थीं। इसे सिर्फ एक भारतीय मामला मानकर छोड़ दिया गया था, जिससे जांच में बहुत देरी हुई। इसी वजह से तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने 23 जून 2010 को पीड़ित परिवारों से सार्वजनिक माफी मांगी थी। उन्होंने अपनी संस्थागत कमियों और प्रशासनिक उपेक्षा का भी खुलकर जिक्र किया था।

कूटनीतिक रिश्तों में आया नया बदलाव

साल 2023 में पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के विवादित बयानों के बाद दोनों देशों के रिश्तों में कड़वाहट आ गई थी। ट्रूडो ने हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत पर बेबुनियाद आरोप लगाए थे जिससे तनाव बहुत बढ़ गया था। लेकिन अब दोनों देशों के बीच कूटनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। दोनों देश अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से बेहतर बना रहे हैं।

मार्च 2025 में मार्क कार्नी के कनाडा के प्रधानमंत्री बनने के बाद रिश्ते फिर से पटरी पर लौटने लगे हैं। यह स्वीकारोक्ति दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने की दिशा में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक कदम है। इससे वैश्विक मंच पर भारत के कड़े रुख और मजबूत नीति की बड़ी जीत हुई है। यह दोनों देशों की कूटनीति के लिए एक बहुत ही शुभ संकेत है।

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