पहले दी थी तख्तापलट की धमकी...अब रिश्ते सुधारने में जुटे ट्रंप, ब्राजील के राष्‍ट्रपत‍ि लूला को दिया खास ऑफर

Brazil-US Relations: ब्राजील के राष्ट्रपति लूला ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से 50 मिनट लंबी फोन बातचीत की, वेनेजुएला, ‘बोर्ड ऑफ पीस’ और कूटनीतिक संबंध सुधार पर चर्चा हुई।
Lula Holds Phone Call With Trump
अमेरिका दौरे पर जाएंगे ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Lula Holds Phone Call With Trump: ब्राजील और अमेरिका के बीच टैरिफ और अन्य मसलों के कारण आई तनावपूर्ण स्थिति अब धीरे-धीरे कम होती दिख रही है। इस बदलाव का संकेत सोमवार को उस समय मिला जब ब्राजील के राष्ट्रपति लुईस इनासियो लूला डा सिल्वा ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ करीब 50 मिनट लंबी फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के बाद ब्राजील सरकार ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पुष्टि की कि लूला जल्द ही वाशिंगटन जाकर ट्रंप से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे।

फोन कॉल के दौरान दोनों नेताओं ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की। सबसे ज्यादा ध्यान वेनेजुएला की स्थिति, ट्रंप के नए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव और संगठित अपराध के खिलाफ लड़ाई पर रहा। वेनेजुएला का मुद्दा खासतौर पर अहम था क्योंकि इस महीने की शुरुआत में अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को नशीले पदार्थों की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाया था।

वेनेजुएला पर कार्रवाई से नाराज थे लूला

लूला ने पहले इस कार्रवाई की कड़ी आलोचना की थी और इसे “रेड लाइन क्रॉस करना” बताया था। लेकिन सोमवार को हुई बातचीत में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे जरूरी है और वेनेजुएला के लोगों के कल्याण के लिए मिलकर काम किया जाना चाहिए।

ट्रंप ने दिया बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का प्रस्ताव

लूला और ट्रंप ने ट्रंप के नए ‘बोर्ड ऑफ पीस’ प्रस्ताव पर भी चर्चा की। लूला ने सुझाव दिया कि इस पहल को केवल गाजा की स्थिति तक ही सीमित रखा जाए, ताकि यह संयुक्त राष्ट्र के समानांतर न खड़ा हो। इसके साथ ही उन्होंने यह भी मांग की कि इस बोर्ड में फिलिस्तीनियों को प्रतिनिधित्व दिया जाए। हालांकि, ब्राजील सरकार ने बयान में स्पष्ट नहीं किया कि लूला ने इस पहल में शामिल होने के ट्रंप के निमंत्रण को स्वीकार किया है या नहीं।

यह बातचीत और लूला के वाशिंगटन यात्रा के संकेत इस बात को दिखाते हैं कि दोनों देश अब अपने कूटनीतिक संबंधों को सुधारने और संवाद के द्वार खुले रखने के प्रयास में हैं। पिछले समय में टैरिफ और विचारधारा को लेकर तनाव बना हुआ था, लेकिन अब यह कदम संबंधों को बेहतर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।