बदल गई Death और Birth Registration की प्रक्रिया! अब देरी की तो लगाना पड़ेगा कोर्ट का चक्कर
Birth Registration Rules: संसद में जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक 2026 पास होने से सर्टिफिकेट नियम बदल गए हैं। अब जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रेशन में देरी करने पर मजिस्ट्रेट व कोर्ट के चक्कर लगाने होंगे।
- Written By: प्रिया सिंह
बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट (सोर्स- AI जनरेटेड)
Parliament Passes New Bill To Change Death And Birth Registration Rules In India: संसद के मानसून सत्र में ‘जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) विधेयक 2026’ को मंजूरी मिल गई है। इस नए महत्वपूर्ण कानून के जरिए वर्ष 1969 के मूल अधिनियम में बड़ा बदलाव किया गया है। अब हमारे देश में बर्थ और डेथ सर्टिफिकेट बनवाने की पूरी प्रक्रिया को पहले से काफी अधिक सख्त और पारदर्शी बनाया गया है ताकि किसी भी तरह के फर्जीवाड़े को पूरी तरह से रोका जा सके।
बर्थ सर्टिफिकेट बच्चे का पहला कानूनी दस्तावेज है जो स्कूल दाखिले और सरकारी योजनाओं में काम आता है। वहीं मृत्यु प्रमाण पत्र भी बैंक खातों के संचालन और संपत्ति के मालिकाना हक के दावों के लिए अनिवार्य माना जाता है। इसके बढ़ते दुरुपयोग को रोकने और सुरक्षा मजबूत करने के लिए ही सरकार ने नियमों में ये बड़े बदलाव किए हैं।
देरी होने पर नए सख्त नियम
अगर आप किसी कारणवश समय पर जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाते हैं, तो अब आपको सख्त नियमों का सामना करना पड़ेगा। नए कानून के पहले बदलाव के अनुसार, अगर रजिस्ट्रेशन में 1 वर्ष से अधिक और 2 वर्ष से कम की देरी होती है, तो इसका पंजीकरण केवल डीएम, एडीएम या उनके द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति और गहन जांच के बाद ही हो पाएगा।
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इसके अलावा अगर रजिस्ट्रेशन में 2 वर्ष से अधिक समय की देरी हो जाती है, तो प्रक्रिया और भी कठिन हो जाएगी। ऐसे मामलों में अब केवल प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही नया रजिस्ट्रेशन संभव हो सकेगा। इसका सीधा मतलब यह है कि दो साल से अधिक की देरी होने पर अब लोगों को वेरिफिकेशन के लिए सीधे कोर्ट के चक्कर लगाने ही पड़ेंगे।
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फर्जी पहचान पर कड़ा प्रहार
संसद में सरकार ने स्पष्ट किया कि सही समय पर पंजीकरण न कराने और सालों बाद फर्जी दस्तावेजों से आईडी बनवाने को रोकना बेहद जरूरी है। लोग गलत नाम और उम्र दिखाकर फर्जी सर्टिफिकेट बनवा लेते थे। इससे सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के वितरण में गड़बड़ी होने के साथ-साथ फर्जी वोटिंग जैसी कई गंभीर और बड़ी समस्याएं भी देश में लगातार पैदा हो रही थीं।
इसलिए नागरिकों को यह विशेष सलाह दी जाती है कि वे जन्म या मृत्यु होने की सूचना समय पर स्थानीय नगर निगम या ग्राम पंचायत को अवश्य दें। अगर आप इस आवश्यक कार्य को समय बीतने के बाद लगातार टालते हैं, तो भविष्य में आपको प्रमाण पत्र बनवाने के लिए विभिन्न सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने होंगे और भारी कानूनी अड़चनों का सामना करना पड़ेगा।
