बांग्लादेश में सियासी तूफान...राष्ट्रपति शहाबुद्दीन के इस्तीफे की अटकलें तेज, मुसीबत में फंसी शेख हसीना!

Bangladesh President Resign: बांग्लादेश में राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन के इस्तीफे की अटकलें तेज हैं। शेख हसीना से कथित संपर्क और मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को इसकी बड़ी वजह बताया जा रहा है।
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बांग्लादेशी राष्ट्रपति के इस्तीफे की अटकलें तेज (सोर्स- सोशल मीडिया)
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Bangladesh President Resignation Speculation: बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। बांग्लादेशी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि राष्ट्रपति मोहम्मद शाहाबुद्दीन जल्द ही अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। पिछले दो दिनों से देश के राजनीतिक गलियारों और मीडिया में इस मुद्दे पर लगातार चर्चा हो रही है। बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक, इस्तीफे की अटकलों के पीछे मई में हुई एक कथित फोन बातचीत को बड़ी वजह माना जा रहा है। रिपोर्ट में दावा है कि लंदन दौरे के दौरान राष्ट्रपति शाहाबुद्दीन ने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से फोन पर बात की थी। इस बातचीत की जानकारी खुफिया एजेंसियों तक पहुंचने के बाद उन्हें पद छोड़ने का संदेश दिए जाने की चर्चा है।

हसीना से संपर्क बना विवाद

एक अन्य बांग्लादेशी अखबार प्रथम आलो की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने दावा किया कि राष्ट्रपति ने हाल ही में शेख हसीना से दोबारा संपर्क करने की कोशिश की थी। इससे सत्ताधारी गठबंधन नाराज बताया जा रहा है। वहीं, BNP के नेताओं का कहना है कि मामला केवल एक फोन कॉल तक सीमित नहीं है, बल्कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां भी इसकी बड़ी वजह हैं।

कौन हैं मोहम्मद शाहाबुद्दीन?

मोहम्मद शाहाबुद्दीन 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में हिस्सा ले चुके हैं और पेशे से पूर्व जज रहे हैं। अप्रैल 2023 में उन्हें संसद ने पांच साल के कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति चुना था। उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब अवामी लीग को संसद में बहुमत हासिल था। संविधान के अनुसार, इस्तीफे की स्थिति में संसद अध्यक्ष अंतरिम राष्ट्रपति का कार्यभार संभालेंगे।

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक आंदोलन के बाद भारत चली गई थीं। इसके बाद उनकी अवामी लीग सरकार गिर गई और मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी। शाहाबुद्दीन उस राजनीतिक बदलाव के बाद भी राष्ट्रपति बने रहे और उन्हें अवामी लीग शासन के आखिरी संवैधानिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है। मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान के साथ उनके रिश्तों को लेकर लगातार अटकलें लगाई जा रही हैं।

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